*इस दिन डेम में श्रद्धा भाव से या पिकनिक मनाने वाले लोग बड़ी संख्या में पहुँचतें है, मेला जैसा माहौल बनता है।*
*जंगल के अंदर कुछ लोग तासपत्ती, या जुआ खेल कर भी अपनी इच्छापूर्ती करते है, कई बार पुलिस इनकी इच्छा पूर्ति में कार्यवाई भी करती है। बारिस ने इस बार बिगाड़ा माहौल।*
*इंडिया क्राइम न्यूज़*
*बिलासपुर---करगी रोड कोटा जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर पर मनोरम पर्यटक स्थल है यँहा कोरी डेम और उस पर बने उमानन्द भवन की सुंदरता प्राकृतिक दृश्य लोगो को अपने ओर आकर्षित कर लेते है। अक्सर लोग संडे के दिन या फिर अवकाश के दिन यँहा बाहर से भी लोग पिकनिक मनाने आते है।*
*आस पास भी दलहा बाबा स्थल, कोटसागर, अंवरापानी, बेलगहना सिद्ध बाबा का स्थान, पर्वत श्रंखला के अंदर जल प्रपात, छोटे बड़े बांध पर्यटकों प्रकृति प्रेमियों को जंगल के अंदर बुला ही लेते है।*
*लेकिन दीपावली के बाद नौमी तिथि के दिन आँवला नवमी या इक्षा नवमी के नाम से प्रसिद्ध है, मान्यता है आज के ही दिन द्वापर युग का प्रारम्भ हुआ था, भगवान विष्णु जी के आठवें औतार भगवान श्री कृष्ण का अवतार भी हुआ था। आज के दिन आंवला पेड़ की पूजा और उसकी छाया के नीचे बैठ कर पूजा पाठ ध्यान, प्रसाद ग्रहण का बड़ा महत्व है, ऐसी मान्यता है कि आंवला पेड़ की पूजा से सभी प्रकार की इच्छाएं पूरी होती है, सुख-समृद्धि आती है रोगों का नाश होता है। इस लिए आज नवमी के दिन कई वर्षों से कोटा के डेम में मेला लगता है लोग भारी संख्या में यँहा आते है आंवला की पूजा करते है पिकनिक परिवार के साथ मानते है और आनंदित होते है।*
*वंही पर कुछ ऐसे भी इच्छा पूर्ति करने वाले लोग है जो इस प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ही नही उठा पाते बल्कि एकांत जंगल का लाभ उठा कर समाजिक बुराई जुवां, सट्टा, जैसे कार्यों में लिप्त हो जाते है, उनकी अस्थाई फड़ें भी लग जाती है और कई लाखो का जुवा का खेल हो जाता है, कभी कभार छूट पुट पुलिस कार्यवाई भी इनके बिरुद्ध हुई है। बिगत वर्ष कोरोना काल के कारण माहौल पूरा फीका रहा, इस वर्ष बड़े पैमाने में भीड़ आने मेला जैसा माहौल बनने के असार थे परंतु पानी वर्षा ने माहौल बिगाड़ दिया, लोगों को ठंढ के मौसम में पानी से भीगना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता यह जानते हुए भी लोगों ने पिकनिक मनाया जंगल का आनंद उठाया, अब तो कुछ सामाजिक संस्थाएं भी अपने समाज के साथ आंवला नवमी के दिन डेम में सपरिवार पहुँच कर पिकनिक मनाते है आंवला पेड़ की पूजा करते है।*

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