352 ज्योत कलश सहित हरियर जवारों से सजा मां चंडिका का भवन।
कोटा- कोटा की अधिष्ठात्री देवी बड़ी मढिया सीतला माता के मंदिर में जावरा, ज्योतिकलश जला कर की जा रही मातारानी की पूजा, नगर के सभी लोग माता की सेवा पूजा कर अपना और अपने परिवार के कल्याण की कामना करते है।
नगर के ह्रदय स्थल पर नगर की रक्षक माता चंडिका का दरबार स्थित है। यंहा पुजारी महराज मनोज तिवारी नित्य माता की पूजा अर्चना,दुर्गा सप्तसती का पाठ कर नगर सहित विश्व कल्याण की कामना करते है।
352 ज्योतिकलश जला कर ,जावरा बो कर मातारानी की साधना करते है। नगर की माताएं प्रातः काल से जल चढ़ाने मा के दरबार मे पहुँचती है।

कोटसागर दुर्गामंदिर में भी मां दुर्गा जी बिराजमान है यंहा भक्त माता के दर्शन पूजा कर पुण्यलाभ अर्जित करते है।यह भी बहुत ही सुंदर मनोरम स्थान है।
शारदीय नवरात्र में मंदिरों के साथ साथ नगर में भी पंडालों में मातारानी के अनेकों स्वरूपों को बिराजित कर पूजा अर्चना की जाती है। पंडालों में माता के दर्शन करने श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
कोटा- कोटा की अधिष्ठात्री देवी बड़ी मढिया सीतला माता के मंदिर में जावरा, ज्योतिकलश जला कर की जा रही मातारानी की पूजा, नगर के सभी लोग माता की सेवा पूजा कर अपना और अपने परिवार के कल्याण की कामना करते है।
नगर के ह्रदय स्थल पर नगर की रक्षक माता चंडिका का दरबार स्थित है। यंहा पुजारी महराज मनोज तिवारी नित्य माता की पूजा अर्चना,दुर्गा सप्तसती का पाठ कर नगर सहित विश्व कल्याण की कामना करते है।
352 ज्योतिकलश जला कर ,जावरा बो कर मातारानी की साधना करते है। नगर की माताएं प्रातः काल से जल चढ़ाने मा के दरबार मे पहुँचती है।

कोटसागर दुर्गामंदिर में भी मां दुर्गा जी बिराजमान है यंहा भक्त माता के दर्शन पूजा कर पुण्यलाभ अर्जित करते है।यह भी बहुत ही सुंदर मनोरम स्थान है।
शारदीय नवरात्र में मंदिरों के साथ साथ नगर में भी पंडालों में मातारानी के अनेकों स्वरूपों को बिराजित कर पूजा अर्चना की जाती है। पंडालों में माता के दर्शन करने श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
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