*एक आदिवासी नाबालिक पीड़ित लड़की को न्याय दिलाने की बजाय मामले को दबाने में लगे जिम्मेदार लोग*
सभी जिम्मेदार लोग अपने कर्तब्य से विमुख हो कर झाड़ रहे पल्ला।*
*आर डी गुप्ता*
*इंडिया क्राइम न्यूज़*
27/09/2020
*बिलासपुर*-- बेलगहना पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम पंचायत करहीकछार, के आश्रित गांव सरगुजिहा पारा में एक मूकबधिर नाबालिग आदिवासी बाला के गर्भवती हो जाने और समाज के ठेकेदारों द्वारा सामाजिक बैठक कर नाबालिग के गर्भ गिराए जाने के तुगलकी फरमान की खबर से एक बार फिर शासन, प्रशासन के रखवाले सवालों के कटघरे में आ खड़े हैं।
अक्सर ऐसी खबरें, शासन द्वारा बनाई गई तमाम योजनाऐं, जो बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटियों की सुरक्षा के लिए हैं वह कागजों में,फाइलों में,मंत्री और अधिकारियों की बैठकों तक ही सिमट कर रह गई हैं। धरातल पर इनका अस्तित्व नजर नहीं आता।
आदिवासी उरांव समाज, मूकबधिर नाबालिग बाला के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने के बजाय उसके पाप को छिपाने नाबालिग लड़की का गर्भ ही गिरा दिया गया।
सवाल उठता है कि आखिरकार 13 वर्षीय नाबालिग मूकबधिर लड़की के साथ दुष्कर्म होता रहा, वह गर्भवती हो गई, फिर भी घर,परिवार, समाज और प्रशासन के लोग जानकारी होने के बाद भी,मौन हैं?
सूत्रों के हवाले से खबर मिलते ही हमनें इस खबर से उन तमाम जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया ताकि मूकबधिर नाबालिग लड़की को कम से कम स्वास्थ्य सुविधा ही मिल जाय ताकि उसका जीवन सुरक्षित हो।
दुष्कर्म के बाद से नाबालिग अपने पेट में गर्भ लिए घर परिवार,मोहल्ला और समाज की चारदीवारी में घूमती रही,लड़की मुह से कुछ बोल नही पाती व सुन भी नहीं सकती, माँ साथ नही रहती है।
जिसे समाज के ठेकेदारों द्वारा,, भरी बैठक में ,,ऐसा फरमान सुनाया गया,, की सुन कर हैरान हो जाएंगे ,, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत करही कछार के सरपंच इस बैठक में शामिल थे सरपंच व समाज के अन्य लोगों द्वारा गांव में बैठक बुलाया गया क्योंकि समाज की एक मूकबधिर नाबालिग बेटी गर्भवती हो गई थी और गांव में तरह तरह की चर्चा हो रही थी। सूत्र बताते हैं कि मीटिंग में यह फरमान सुनाया गया कि नाबालिग लड़की का गर्भपात करा दिया जाय।
उसके बाद आनन फानन में उसे पहले गनियारी ले जाया गया जहां नाबालिग बाला का अबार्शन करनें से साफ इंकार कर दिया गया। उसके बाद कोरबा लेजाकर उसका अबॉर्शन करवाने की खबर आ रही है।
सूत्रों की माने तो गांव में ही जंगली जड़ी बूटी खिला कर गर्भ गिरा दिया गया,,जिसके बाद यह खबर आस पास लोगों तक आग की तरह फैल गई, अब मूकबधिर नाबालिग लड़की के गर्भवती होने के
मामला को दबाया जा रहा है।
एक नाबालिग लड़की जिसकी उम्र अभी खेलने कूदने और पढ़ने लिखने की उसका गर्भवती हो जाना और फिर मामले की शिकायत परिजनों और आस पड़ोस के लोगों द्वारा नहीं करना और जिम्मेदार अधिकारियों को जानकारी देने के बाद भी मामले को गंभीरता से संज्ञान में नहीं लेना,अपने आप में कई गंभीर सवालों को जन्म देता है।
एक नाबालिग आदिवासी समाज की मूकबधिर बाला के साथ हुए अनाचार के बाद गर्भ गिराए जाने के मामले की जानकारी महिला बाल विकास के परियोजना अधिकारी कोटा को मामले की गंभीरता और नाबालिग के गर्भ धारण से लेकर गर्भपात की महत्वपूर्ण जानकारी से अवगत कराया गया वहीं परियोजना अधिकारी ने कहा कि मैं पता करा लेता हूँ और फिर आपको जानकारी देता हूँ लेकिन परियोजना अधिकारी जो मुख्यालय में रहते ही नहीं ने ना ही मामले की जानकारी दी ना ही पता कराना जरूरी समझा। हमें तो सूत्रों से जानकारी मिली कि इस गंभीर मामले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने सुपरवाइजर को अवगत करा अपनी ड्यूटी बड़ी ईमानदारी से पूरी की थी कुल मिलाकर महिला बाल विकास विभाग ऐसे लापरवाह अधिकारी कर्मचारी के वजह से एक मूकबधिर आदिवासी नाबालिग बाला बिन ब्याही मां और फिर समाज के ठेकेदारों के गर्भपात कराने का तुगलकी फरमान झेलने मजबूर रही। इतना सब कुछ घट जाने के बाद भी महिला बाल विकास विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाना कई गंभीर सवालों को जन्म देता नजर आता है।
क्या महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों को किसी नाबालिग के विवाह की सूचना मिलने पर पुलिस के सहयोग से विवाह रोके जाने की तरह इस खबर को पढ़ने के बाद संज्ञान में लेकर मूकबधिर नाबालिग को न्याय दिलाने का प्रयास क्यों नहीं किया गया अपने आप में एक बड़ा सवाल है!
*नाबालिग मूकबधिर गर्भपात जैसे गंभीर मामले में महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी नें भी झाड़ा पल्ला...*
*नाबालिग मूकबधिर गर्भपात जैसे गंभीर मामले में महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी नें भी झाड़ा पल्ला...*
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