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*शारदीय नवरात्रि में देवालय सूने, मदिरालय गुलजार,मन्दिर जाना हुआ बन्द, सराब दुकानों में मदिरा रानी के दर्शन में लगती लाइन।*

*शारदीय नवरात्रि में देवालय सूने, मदिरालय गुलजार,मन्दिर जाना हुआ बन्द, सराब दुकानों में मदिरा रानी के दर्शन में लगती लाइन।*
*शारदीय नवरात्रि में देवालय सूने, मदिरालय गुलजार,मन्दिर जाना हुआ बन्द, सराब दुकानों में मदिरा रानी के दर्शन में लगती लाइन।*

*आर डी गुप्ता*
*इंडिया क्राइम न्यूज़*

*18/10/2020*

*बिलासपुर*-- इस समय हिन्दू धर्म के अनुसार सबसे पबित्र और शक्ति की उपासना के दिन नवरात्र चल रहे है। जगह जगह शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा जी की पूजा अर्चना होती थी उत्सव मनाते थे। 

पहला दिन माता शैलपुत्री, दूसरा दिन माता ब्रम्हचारणी, तीसरा दिन चन्द्रघण्टा, चौथा दिन कूष्माण्डा, पाँचवा दिन स्कन्ध माता, छठवाँ दिन कात्यायनी माता, सातवाँ दिन कालरात्री माता, आठवाँ दिन महा गौरी माता और नवें दिन सिद्धदात्री माता के रूप में नव देवी के परम शक्तिशाली स्वरूपों की पूजा होती है। साथ ही मनोकामना ज्योति कलश जला कर भक्त गण माता से अपनी मनोकामनाओ की पूर्ति की कमना करते है।

वैसे तो चार नवरात्र आतें है। जिनमें दो ग्रहस्थो की साधना के लिये महत्वपूर्ण मने जाते है।

कोरोना महामारी का पूरे जनजीवन के साथ मंदिरों के देवी देवताओं पर भी असर पड़ा है। संक्रमण को रोकने के लिहाज से सम्पूर्ण भारत बन्द कर दिया गया था।जो अब धीरे धीरे खुल रहा है। सब कुछ सामान्य हो रहा है। परन्तु खतरा टला नही है वह हर ब्यक्ति के सर पर मंडरा रहा है। जब तक माकूल दवा या बैक्सीन नही बन जाती तब तक सामाजिक दूरी, और मास्क जरूरी है के कारण मन्दिरों और दुर्गा पंडालों , यँहा तक लंकेश के आकार पर भी नियम कानून लागू हुये, इसमे मानवता और जीवन रक्षा का ही उद्देश्य है। दो नवरात्रो से ज्योत कलश भी मंदिरो में नही जल रहे इस बार मां महामाया दरबार रतनपुर में सशर्त जल रहे है।कुछ और मंदिरों भी ज्योत जलाये गए है। पर दर्शनों की अनुमति प्रसाशन स्तर पर नही है। कारण कोरोना संक्रमण। और जरूरी भी है।

पर वहीं एक तरफ देवालय बन्द, नियम कानून के दायरे में खुले है अन्दर बैठे देवी देवता भी हस रहें है कि क्या हो रहा है इन्सान ने भगवान को कैद कर रखा है ।वह भी ताले में, प्रेम में नही.. डर में।

तो दूसरी तरफ कोरोना के संक्रमण से बेखौफ निर्भीक हो कर लोग मदिरालय में मदिरा रानी के दर्शन करने के लिये लम्बी लाइनों में खड़े दिखतें है दो गज की दूरी तो दूर मास्क भी हवा में उड़ा कर सुरा प्रेमी सुरा सुंदरी को लेने के लिये भीड़ लगाते है क्या यँहा के लिये नियम नही बने।या फिर यँहा सराब दुकानों से कोरोना का संक्रमण नही फ़ैलेग। कुछ लोग कहते है कि हैंड सेनेटाइजर में 90 प्रतिसत अल्कोहल रहती है जब वह कोरोना वाइरस मार सकती है तो हम तो 95 प्रतिशत वाली अल्कोहल के लिये खड़े है इसके अन्दर जाने से कोरोना का बाप भी नही नजदीक फटकेगा।

खैर इस भ्रम में पड़ने की जरूरत नही है पर कोई ऐसी सत्ता है जो सब को संचालित कर रही है। जो सब के अन्दर प्राण वायू बन कर ऊर्जा प्रदान कर रही है।

बहुत पहले एक कहावत बनी थी *की रामचन्द्र कह गये सिया से, एक दिन ( ऐसा ) कलयुग आयेगा, मन्दिर सूना सूना होगा, भरी रहेंगी मधुशाला।* और आज वही बाते एकदम सही सटीक प्रतीत होती है।कारण कोरोना का संक्रमण ही है।
फिर भी सावधानी जरूरी है , मास्क का प्रयोग अति आवश्यक है।

घर पर ही मां शक्ति की आराधना उपासना करें। मंदिरों में भीड़ न लगायें दर्शन करना जरूरी ही तो एक एक कार दर्शन कर मन को शांति देवें। वही मां सर्व शक्तिमान है इस कोविड 19 महामारी से भी सभी की रक्षा करेंगी। सभी प्रार्थना करें कि सभी का पूरे भारत सहित बिस्व का कल्याण हो सभी महामारी के ताण्डव से मुक्त हों देश मे आमन चैन और शांती का माहौल हो।
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