भैस का दूध दही फसहर का चावल महुआ से की जाती है पूजा।
इंडिया क्राइम न्यूज़
कोटा-बिलासपुर-- माताएं अपने पुत्रों के दीर्घायु एवम सुख समृद्धि के लिए हल खष्ठी का ब्रत रखती है औऱ पूजा करती है। हलखष्ठी को कमरछठ या ललही खष्ठी भी कहते है।

मान्यताओं के अनुसार देवकी माता श्री कृष्ण जैसे पुत्र पाने और उनकी रक्षा के लिए हलखष्ठी माता के ब्रत को रखा था, एक और कथा के अनुसार एक माँ ने अपने पुत्र की रक्षा बलराम जी से करने के लिए हल खष्ठी ब्रत को रखा था एक बार बलराम बहुत क्रोधित हो कर किसी को मारने दौड़े तब उनकी माँ रक्षा के लिए हल खष्ठी माता के ब्रत को रखा था इस ब्रत के प्रभाव से बलराम के प्रमुख अस्त्र हल एक पलास और कुश की जड़ में फस गया और नही निकला और उसकी जान बच गई।तभी से माताएँ पूजा के स्थान में एक सगरी या तालाब,कुंड जैसा बना कर उसमें पलास और कुश के पौधों व डालों को लगाकर पूजा करतीं है साथ मे मिट्टी के बने कुढ़वा में सात किस्म का अनाज मेवा भर कर पूजा करती हैं। महुआ और फसहर का चावल भैस का दूध दही घी से पूजा कर इसी से बने खीर का प्रसाद ले कर फरहार करतीं है। कई जगहों पर भाजी भी पूजा में चढ़ाते है।

पुत्रों के दीर्घायु की कामना से सुख समृद्धि के लिए भारत के कई प्रान्तों में इस त्योहार को बड़ी ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार दो दिन शनिवार और राबिवार को मनाया जा रहा है।


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कोटा-बिलासपुर-- माताएं अपने पुत्रों के दीर्घायु एवम सुख समृद्धि के लिए हल खष्ठी का ब्रत रखती है औऱ पूजा करती है। हलखष्ठी को कमरछठ या ललही खष्ठी भी कहते है।

मान्यताओं के अनुसार देवकी माता श्री कृष्ण जैसे पुत्र पाने और उनकी रक्षा के लिए हलखष्ठी माता के ब्रत को रखा था, एक और कथा के अनुसार एक माँ ने अपने पुत्र की रक्षा बलराम जी से करने के लिए हल खष्ठी ब्रत को रखा था एक बार बलराम बहुत क्रोधित हो कर किसी को मारने दौड़े तब उनकी माँ रक्षा के लिए हल खष्ठी माता के ब्रत को रखा था इस ब्रत के प्रभाव से बलराम के प्रमुख अस्त्र हल एक पलास और कुश की जड़ में फस गया और नही निकला और उसकी जान बच गई।तभी से माताएँ पूजा के स्थान में एक सगरी या तालाब,कुंड जैसा बना कर उसमें पलास और कुश के पौधों व डालों को लगाकर पूजा करतीं है साथ मे मिट्टी के बने कुढ़वा में सात किस्म का अनाज मेवा भर कर पूजा करती हैं। महुआ और फसहर का चावल भैस का दूध दही घी से पूजा कर इसी से बने खीर का प्रसाद ले कर फरहार करतीं है। कई जगहों पर भाजी भी पूजा में चढ़ाते है।

पुत्रों के दीर्घायु की कामना से सुख समृद्धि के लिए भारत के कई प्रान्तों में इस त्योहार को बड़ी ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार दो दिन शनिवार और राबिवार को मनाया जा रहा है।


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