मंदिरों और हर घरों में मनाया गया जन्माष्टमी का त्योहार।
इंडिया क्राइम न्यूज़
कोटा-बिलासपुर- भादौ मास में अष्टमी के दिन रोहणी नक्षत्र में रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है कोटा में भी इसी शुभ घड़ी में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मंदिरों और घरों में बड़े ही भक्तिभाव से उपवास रह कर लोगों के द्वारा मनाया गया।

सुबह से राधा कृष्ण मारवाड़ी मंदिर सहित नगर के कई मंदिरों में उत्सव की तैयारियां सुरु हो गई थीं वही श्रद्धालुओं ने अपने अपने घरों में भी श्री कृष्ण जी जन्मोत्सव की तैयारियों में लगे रहे,

उपवास रख कर भादौ मास की अष्ठमी के दिन रात 12 बजे रोहणी नक्षत्र में भगवान का जन्म मंदिरों और घरों में मनाया गया। साथ ही युवाओं की टोली मटकी फोड़ प्रतिस्पर्धा भी जगह जगह रखती है और मल्ल खम्भ का भी आयोजन किया जाता है।
मंदिरों में सजावट और भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव देखने लोगो की भीड़ उमडने लगती है।राधाकृष्ण मारवाड़ी मंदिर में राधारानी और श्रीकृष्ण जी के दर्शन करने के लिए साम से ही दर्शनार्थी पहुचने लगे मंदिर में सभी को प्रसाद वितरण कर उत्सव मनाया गया।

अर्धरात्रि में भय प्रकट कृपाल की धुन गूंजने लगी मंदिरों और घरों में संखध्वनी,घड़ियाल,घंटा बजने लगे श्री कृष्ण का काली अंधियारी रात में 12 बजे सभी सनातन धर्मावलंबियों ने पूजा पाठ आरती कर श्रीकृष्ण जी का जन्म उत्सव मनाया और एक दूसरे को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

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कोटा-बिलासपुर- भादौ मास में अष्टमी के दिन रोहणी नक्षत्र में रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है कोटा में भी इसी शुभ घड़ी में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मंदिरों और घरों में बड़े ही भक्तिभाव से उपवास रह कर लोगों के द्वारा मनाया गया।

सुबह से राधा कृष्ण मारवाड़ी मंदिर सहित नगर के कई मंदिरों में उत्सव की तैयारियां सुरु हो गई थीं वही श्रद्धालुओं ने अपने अपने घरों में भी श्री कृष्ण जी जन्मोत्सव की तैयारियों में लगे रहे,

उपवास रख कर भादौ मास की अष्ठमी के दिन रात 12 बजे रोहणी नक्षत्र में भगवान का जन्म मंदिरों और घरों में मनाया गया। साथ ही युवाओं की टोली मटकी फोड़ प्रतिस्पर्धा भी जगह जगह रखती है और मल्ल खम्भ का भी आयोजन किया जाता है।
मंदिरों में सजावट और भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव देखने लोगो की भीड़ उमडने लगती है।राधाकृष्ण मारवाड़ी मंदिर में राधारानी और श्रीकृष्ण जी के दर्शन करने के लिए साम से ही दर्शनार्थी पहुचने लगे मंदिर में सभी को प्रसाद वितरण कर उत्सव मनाया गया।

अर्धरात्रि में भय प्रकट कृपाल की धुन गूंजने लगी मंदिरों और घरों में संखध्वनी,घड़ियाल,घंटा बजने लगे श्री कृष्ण का काली अंधियारी रात में 12 बजे सभी सनातन धर्मावलंबियों ने पूजा पाठ आरती कर श्रीकृष्ण जी का जन्म उत्सव मनाया और एक दूसरे को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

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