*कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए आयोजको ने मनाया दुर्गोत्सव,और दशहरा उत्सव।*
*इंडिया क्राइम न्यूज़*
*बिलासपुर-- कोटा में दशहरा उत्सव बड़े जोरदार अंदाज में मनाया जाता है, बिगत दो वर्षों से कोरोना के संक्रमण के चलते दशहरा उत्सव नही मनाया गया था। परन्तु इस वर्ष दशहरा उत्सव, दुर्गाउत्सव अच्छे से नियमानुसार मनाया गया।*
*दशहरा के दिन कोटा में मेला लगता है दूर दराज गाँवो, सहरों से भी लोग यँहा का दशहरा उत्सव देखने आते है। मेला सायं सात बजे से रात्री 1 बजे तक अपने चरम आकर्षण में रहता है। सभी दुर्गा पंडालों में भी भंडारा, प्रसाद का वितरण चलते रहता है। इस वर्ष भी कामाख्या दुर्गोत्सव समिति ने भंडारा का प्रसाद बितरण किया। जगह जगह से आने वाले दर्शनार्थियों को दुर्गा उत्सव, दशहरा उत्सव, का मनमोहक दृश्य, रोके रखता है।*
*कोटा में झांकी बनाने और रात्री में झांकी बाजे गाजे के साथ नगर में भ्रमण कराने की परम्परा है जो दशहरा देखने आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है। भीड़ इकट्ठी होती है। यँहा की झांकियों को बिलासपुर के लोग खरीद कर लेजाते है और दूसरे दिन ये सभी झाँकियाँ बिलासपुर दशहरा उत्सव की रौनक बनती है।*
*इस वर्ष कोरोना की गाइड लाइन का पालन करते हुए झाँकियाँ बहुत कम बनाई गई है। फिर भी कुछ चार पाँच झाँकियाँ बानी और रात में दशहरा उत्सव में बाजे गाँजे के साथ निकाली गई, नगर दशहरा समिति आयोजको को रावण दहन के बाद झांकियों को बनाने वाले कलाकारों सहयोगियों को उत्साहवर्धन के लिए पुरस्कार भी प्रदान करती है।*
*इस साल फ़िरंगीपारा के नवयुवक टीम ने नागमाता सुरसा के द्वारा हनुमान जी का बल, बुद्धी, की परक्षा लेने के लिये, देवताओं ने समुद्र में सुरसा को भेज कर माता सीता जी का पता लगाने जाने के लिए वायु मार्ग से जा रहे हनुमान जी का रास्ता रोकने के लिए समुद्र में लगाया था। इस थीम पर एक झांकी बनाई गई और जो दसहरा उत्सव से जुड़ी कहानी को सार्थक करती है। सुरसा माता ने हनुमान जी के विनय करने के बाद भी उनको जाने नही देती, और अपना मुख 16 जोजन तक हनुमान जी को खाने के लिए फैला लेती है तभी हनुमान जी उनके पेट मे प्रवेश करके तुरंत बाहर आ जाते है, और माता सुरसा उन्हें बरदान देते हुए आगे जाने देती है और परीक्षा में पास हो जाने पर कहती है कि आप श्री राम के कार्य को पूर्ण करके ही वापस आएंगे, आप इस कार्य के योग्य है।*

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