*होटल संचालक से लेकर मध्यप्रदेश शासन में खाद्यमंत्री तक स्वर्णिम सफर, जनप्रिय नेता बने।*
*आर डी गुप्ता*
*इंडिया क्राइम न्यूज़*
*बिलासपुर में भाजपा की जड़े मजबूत करने में सबसे बड़ा योगदान दिया,*
*तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के बेहद करीबी माने जाते रहे।*
*बिलासपुर---सन 1937 में बिलासपुर में जन्मे श्री मूलचन्द खंडेलवाल उर्फ मुल्लू भैया बचपन से ही सरल मृदुभाषी, कुशाग्र बुद्धी के धनी थे अपने लोगों को और बड़े होने पर ब्यापारियों में काफी पसंदीदा चेहरा बन गए थे।*
*श्री खंडेलवाल बड़े होन पर ब्यवसाय से जुड़े और नीलकमल होटल का संचालन सुरु किया काफी तरक्की की ब्यवसाय में और 1980 में आपने बिलासपुर गोलबाजार के बाजार वार्ड से निगम में पार्षद का चुनाव लड़े और बिजई हो गए तभी से इनका राजनीतिक सफर भाजपा के प्रति तेजी से सुरु हो गया।निगम में मन्नू मिश्रा, डी पी अग्रवाल से इनकी मित्रता प्रगाढ़ हो गई। और निगम में भी इनका बर्चस्व दिखता था।*
*नीलकमल होटल में इन तीनों मित्रों को राजनीतिक चर्चा और आगामी रणनीति बनती थी, इसी बीच आपको 1990 में बिलासपुर बिधान सभा से भाजपा से बिधायक की टिकट मिलगई, और आपने कांग्रेस के अभेद्य गढ़ को अपनी रणनीति के कुशलता से ढहा दिया भेद दिया और लगभग 1000 से अधिक मतों से अपने प्रतिद्वंदी दिग्गज कांग्रेसी बिधायक बी आर यादव को पराजित कर दिया था। बिधायक बने और अविभाजित मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनी उसमे मुख्यमंत्री श्री सुंदरलाल पटवा बने और मूलचन्द खांडेल वाल खाद्यमंत्री बनाये गए। खरसिया उपचुनाव के समय से मूलचन्द खंडेलवाल मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के काफी करीवियों में शामिल हो गए थे। खंडेलवाल अपनी दबंगता और निर्णायक कार्यशैली के लिए मशहूर थे।*
*मूलचन्द खंडेलवाल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य रहे, आपातकालीन में जेल भी गए, और भाजपा की साख को मजबूत करते रहे, दुबारा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा फिर कांग्रेश से बी आर यादव जीते। सन 1998 के बिलासपुर बिधान सभा चुनाव में अमर अग्रवाल को टिकट भाजपा से मिली और भाजपा में नए चेहरे के बाद इनकी उपेक्षा की गई, लेकिन मूलचन्द खंडेलवाल काफी समय तक मुख्य राजनीतिक धारा से अलग रहने के बाद अचानक 2013 में कोटा से कांग्रेस की अभेद्य सीट से फिर छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी जी की पत्नी श्री मती रेणू जोगी के खिलाफ लड़ाया गया। और भाजपा की सरकार होने के बाद पराजय का सामना करना पड़ा तब से वह शेर दिल नेता अंतर्मन से टूट से गया था।*
*लेकिन उन्होंने अपने परिचितों, कार्यकर्ताओं के कार्य के लिए मरते दम तक सेवा में लगे रहे उनके पास साईं मंगलम जो भी कार्यकर्ता गया वह संतुस्ट होकर निकला, बिना नास्ता खाना खिलाये किसी को जाने ना देने वाला वह खाद्यमंत्री नेता 15 अक्टूबर को इस धराधाम से विदा ले लिया,और सब को अपने परिजनों, परिचितों, मित्रों,कार्यकर्ताओं को एक गहरी खामोसी में छोड़ कर दुनिया से अपने सबसे अलबिदा......कर...न जाने कंहाँ....चले गए.....आज 17 अक्टूबर की प्रार्थना सभा उनके निवास स्थान साईं मंगलम में रखी गई सभी उनके परिवार,परचित,प्रेमी स्वजन, कार्यकर्ताओं ने कहा कि बाबूजी आप को भुलाया नही जा सकता,आप स्वर्ग में वास करें और सभी चाहनेवालों पर कृपा की वर्षा करते रहें।*

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