आप ही गोया मुसाफिर..आप ही मंजिल हूं मैं...सिद्धार्थ औलिया
इंडिया क्राइम न्यूज़
बिलासपुर/दिल्ली-- धर्मचक्र सत्संग के 117वें अध्याय में समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने आध्यात्मिक संदेश में कहा कि.. स्वयं का आत्मपरिचय पाना ही.. ध्यान है। जिंदगी भर गुफ्तगू की गैरों से मगर, खुद से ही मुलाकात हो नहीं पाई और ज्यों ही व्यक्ति ध्यान के माध्यम से स्वयं का परिचय पाता है तो कह उठता है की आप ही गोया मुसाफिर और आप ही मंजिल हूं मैं।
वहीं ओशोधारा- 365 में नए सप्ताह की शुरुआत ओशोधारा महिला सशक्तिकरण कोऑर्डिनेटर आचार्या रचना अग्रवाल ने सक्रिय ध्यान से की। जहां ओशोधारा-365 के सदस्य प्रतिदिन ऑनलाइन जुड़कर सुबह कुंडलिनी ध्यान, सुप्रभात ध्यान, संजीवनी ध्यान, कीर्तन ध्यान इत्यादि द्वारा दिनभर आत्मावान व तरोताजा रहते हैं वहीं रविवार को समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया से धर्मचक्र सत्संग में सीना-बसीना होते हैं एवं नए साधकों को समर्थगुरु से माला दीक्षा लेने का अवसर मिलता है।
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