मान्यता है.. रतनपुर की महारानी सुरंग मार्ग से.. इस मंदिर में आती थी पूजा करने..।
कोटा-बिलासपुर-- बहुत ही अदभुत रहस्यमयी स्वयंभू भगवान शंकर जी का अति प्राचीन मंदिर जंहा भक्तगण बताते है कि आज भी भगवान सूर्य देव जी की पहली किरण से इस शिवलिंग का अभिषेक होता है।

यंही पुरातन गढ़कालिका माता जी का मंदिर बिराजमान है जो अपने अंदर अद्भुत रहस्यमयी, अपराजेय शक्तियाँ समाहित किये हुए है मान्यता है कि जब रतनपुर का नाम रत्नासारपुर था तब यंहा की महारानी 3-4 किमी जमीन के अंदर से बनी सुरंग से अपने रनिवास या किले से यंहा माता गढ़काली जी और स्वयंभू भगवान संकर जी की पूजा अपने राज्य गढ़ यानी किले की रक्षा,सुख समृद्धि की कमना कि लिए पूजा करने आती थी। लोग बताते है कि सायद इसी लिए गढ़ यानी किले की रक्षक देवी माता काली जी का नाम गढ़कालिका पड़ा होगा।

यह परम स्थान कोटा से 12 किमी दूर जुनाशहर में बिद्यमान है जो माता लेखनी देबी और रतनपुर सिद्ध शक्तिपीठ माता महामाया देवी के मंदिर से लगभग तीन चार किमी दूर पर स्थित है।यंहा नवरात्री में अखण्ड ज्योत कलश प्रज्वलित किया जाता है।

और इस मंदिर की एक और विशेषता बताते है कि यंहा कन्यायों के द्वारा माता का पूजन किया जाता है। यह मनोबांछित फल देने वाला सिद्ध गढ़कालिका देवी का स्थान है।
इस मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं के द्वारा नवरात्री में प्रतिदिन साम के समय मे आरती भजन जशगीत के बाद भंडारे का आयोजन किया जाता है सभी भक्त परिवार के साथ माता के दरबार मे आते है।औऱ पूजा कर भंडारे के प्रशाद को प्राप्त करते हैं।
चतुर्थी के दिन प्रसाद भंडारे की ब्यवस्था माता जी के चरणों में ओ पी गुप्ता जी एवम उनके परिवार के द्वारा की गई थी। इस अवसर पर ओ पी गुप्ता, परमेश्वर साहू, निर्मलकर सर, यादव जी, प्रशांत गुप्ता सहित और भक्तगण परिवार के साथ पूजा आरती भंडारे में उपस्थित रहे।
वैसे तो रतनपुर अद्भुत शक्तियों का और पवित्र तालाबों का परम रम्य सुमधुर स्थान है। यंहा माता महामाया शक्ति पीठ के रूप में विराजमान है, महाकाल भैरव बाबा भी साक्षात रूप में बिराजमान है। माता लक्ष्मी की दात्री लखनी देवी अपने दिब्य स्वरूप में विराजमान है, वंही बूढामहादेव शंकर जी ,रामटेकरी में राम जी ,गिरजाबन में श्री हनुमान जी,जूना शहर में स्वयम्भू शंकर जी, गढ़कालिका माता जी अपने भक्तों धर्मंप्रेमियों की रक्षा एवम कल्याण के लिए बिराजमान है। जरूरत है भक्ति पूर्ण भाव की-- क्योकि रामायण में कहा गया है कि-- हरि ब्यापक सर्बत्र सामना... प्रेम ते प्रगट होहिं मैं जाना।।

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