गन्ने के मंडप बनाकर ..साड़ी चढ़ाकर पूजा कर .. फलों पकवानों का भोग लगाया गया।
छठ पर्व बिहार का मूल पर्व है ..पर आज कई प्रान्तों में बड़े श्रद्धा- उत्साह के साथ मनाया जाता है..कोटा नगर में भी बड़े उत्साह के साथ मनाया गया।
इंडिया क्राइम न्यूज
करगीरोड - कोटा नगर के कोटेस्वर जलासय के घाट में ब्रती महिलाओं,पुरुषों, ने चार दिन से चल रहे छठ पर्व के महापर्व के अवसर पर, कल शाम को अस्त होते हुए सूर्य देव को पानी मे खड़े होकर पूजा कर अर्घ दिया। और आज 20 नवम्बर दिन सोमवार की सुबह चार बजे से ही तालाब के किनारे ब्रती महिला पुरुष पहुँचने लगे थे औऱ सुबह जल में स्नान कर गीले कपड़े में ही पूजा कर उगते हुए भगवान सूर्य देव की पूजा कर अर्घ दिया।
यह छठ पर्व छठ माता का बिसेष पर्व है इसे खास तौर पर बिहार में मनाया जाता था परंतु आज यह लगभग देश के कई प्रान्तों में मनाया जाने लगा है। इस मे बताते है कि ब्रती महिलाएं नदी या तालाब में स्नान कर गीले कपड़े में कमर तक पानी मे सूर्य देव की पूजा कर अर्घ देती है।हवन करती है, गन्ने का मंडप बना कर,साड़ी चढ़ाकर, बिसेष पकवान, फल,मूली आदि को चढ़ा कर पूजा करती है, ब्रती पुरुष बांस के बने,सूपा,टोकनी या छीटा में पूजा सामग्री सर में रख कर चलते है, फिर ब्रती मातायें खरना का प्रसाद भी, वितरण एक दूसरे को करती है।
आज कोटेस्वर जलासय के तट पर 20 नवम्बर को उगते सूर्य को ब्रती महिलाएं पूजा कर सूर्य भगवान को अर्घ देकर पूजा किया और अपने परिवार, पुत्र आदि की सलामती की खुशहाली एवम स्वस्थ रहने की कामना किया। यह छठ पर्व की पूजा बड़ी कठिन और महत्वपूर्ण मानी जाती है। छठ मैया और भगवान सूर्यदेव ब्रती की सारी इच्छाएं पूर्ण करतें है। कोटा नगर में कुछ बिहार के रहने वाले परिवारों के साथ कोटा नगर के सभी समाज अग्रवाल समाज, अग्रहरी समाज, ब्राम्हण समाज, क्षत्री समाज, गुप्ता समाज सहित सभी बर्गों की महिलाओं ने कोटसागर जलासय पहुँच कर उगते हुए सूर्य देव भगवान को अर्घ देकर छठ पूजा में सम्लित हुईं, बैंड बाजे नगाड़े के साथ पूजा आरती अर्घ दिया गया और छठ ब्रत का समापन भी आज हुआ।
छठ पर्व बिहार का मूल पर्व है ..पर आज कई प्रान्तों में बड़े श्रद्धा- उत्साह के साथ मनाया जाता है..कोटा नगर में भी बड़े उत्साह के साथ मनाया गया।
इंडिया क्राइम न्यूज
करगीरोड - कोटा नगर के कोटेस्वर जलासय के घाट में ब्रती महिलाओं,पुरुषों, ने चार दिन से चल रहे छठ पर्व के महापर्व के अवसर पर, कल शाम को अस्त होते हुए सूर्य देव को पानी मे खड़े होकर पूजा कर अर्घ दिया। और आज 20 नवम्बर दिन सोमवार की सुबह चार बजे से ही तालाब के किनारे ब्रती महिला पुरुष पहुँचने लगे थे औऱ सुबह जल में स्नान कर गीले कपड़े में ही पूजा कर उगते हुए भगवान सूर्य देव की पूजा कर अर्घ दिया।
यह छठ पर्व छठ माता का बिसेष पर्व है इसे खास तौर पर बिहार में मनाया जाता था परंतु आज यह लगभग देश के कई प्रान्तों में मनाया जाने लगा है। इस मे बताते है कि ब्रती महिलाएं नदी या तालाब में स्नान कर गीले कपड़े में कमर तक पानी मे सूर्य देव की पूजा कर अर्घ देती है।हवन करती है, गन्ने का मंडप बना कर,साड़ी चढ़ाकर, बिसेष पकवान, फल,मूली आदि को चढ़ा कर पूजा करती है, ब्रती पुरुष बांस के बने,सूपा,टोकनी या छीटा में पूजा सामग्री सर में रख कर चलते है, फिर ब्रती मातायें खरना का प्रसाद भी, वितरण एक दूसरे को करती है।
आज कोटेस्वर जलासय के तट पर 20 नवम्बर को उगते सूर्य को ब्रती महिलाएं पूजा कर सूर्य भगवान को अर्घ देकर पूजा किया और अपने परिवार, पुत्र आदि की सलामती की खुशहाली एवम स्वस्थ रहने की कामना किया। यह छठ पर्व की पूजा बड़ी कठिन और महत्वपूर्ण मानी जाती है। छठ मैया और भगवान सूर्यदेव ब्रती की सारी इच्छाएं पूर्ण करतें है। कोटा नगर में कुछ बिहार के रहने वाले परिवारों के साथ कोटा नगर के सभी समाज अग्रवाल समाज, अग्रहरी समाज, ब्राम्हण समाज, क्षत्री समाज, गुप्ता समाज सहित सभी बर्गों की महिलाओं ने कोटसागर जलासय पहुँच कर उगते हुए सूर्य देव भगवान को अर्घ देकर छठ पूजा में सम्लित हुईं, बैंड बाजे नगाड़े के साथ पूजा आरती अर्घ दिया गया और छठ ब्रत का समापन भी आज हुआ।
Comments