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कोटा-बिलासपुर से.. बाबा अमरनाथ जी के दर्शन करने.. पहला जत्था पहुँचा पहलगाँव से चंदनबाड़ी..सुबह 6 बजे से चढ़ाई यात्रा प्रारम्भ।

बाबा बैद्यनाथ धाम के  काँवरिया भक्तों में से चार लोग ने चंदनबाड़ी से सुरु की आज 48 किमी की कठिन बर्फीली यात्रा।

बाबा अमरनाथ जी का सहारा है.. सारा जग हमारा है। की गूँज से यात्रा प्रारम्भ। 

इंडिया क्राइम न्यूज़
आर डी गुप्ता

बिलासपुर-- पहलगाँव-चंदनबाड़ी से बाबा अमरनाथ की यात्रा में शामिल प्रशांत गुप्ता की रिपोर्ट-- बाबा अमरनाथ धाम की यात्रा में  दुर्गम पहाड़ी यात्रा शुरू हो गई है, मौसम बेहद ठंढा है,प्राकृतिक सौंदर्य तो देखते ही बनता है कल कल करती बर्फीली नदियां मधुर तान सुनाती हुई बह रही है।कोई संत बुद्ध चेतना ही इनके आनंदित स्वरों को सुन पाती है ।वैसे कल कल की आवाज तो सभी को सुनाई देती है। 



इस कठिन यात्रा में जो बाबा अमरनाथ जी मां पार्वती जी की कृपा से सुगम हो जाती है बाबा के दर्शन की अभिलाषा से कोटा बिलासपुर छत्तीसगढ़ से पहली जत्था टोली में प्रशांत गुप्ता, रितेश अग्रवाल, दीपक, सुशील गुप्ता आज चंदनबाड़ी से बाबा बर्फानी अमरनाथ जी के दर्शन करने के लिए  पहाड़ी बर्फीली यात्रा में चल पड़े है। बताते है कि यह यात्र पहलगाँव की तरफ से चंदनबाड़ी होते हुए लगभग 48 किमी दुर्गम चढ़ाई है जो लिद्दर घाटी के उत्तरी छोर पर 12700 फिट की उचाई पर  वंहा प्राकृतिक रूप से निर्मित बर्फ से बने बाबा अमरनाथ जी बिराजित है और बर्फ से ही शिव लिंग वंहा बनता है उसी दिव्य शिवलिंग के दर्शन करने भक्तों की भीड़ उमड़ती है, सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। फिर बालटाल की तरफ से उतरकर ये यात्री वापस आएंगे।



कथा है कि यह बहुत ही पवित्र स्थान है सर्वोत्तम पवित्र गुफा है पूरी तरह से हिमाच्छादित है यंहा एक बार बाबा भोले नाथ ने माता पार्वती जो कोf एक कथा माता जी की इच्छा पर सुनाई थी और आध्यात्म के अति गूढ़ रहस्यों का वर्णन माता जी को सनाया था,पर माँ पराम्बा को बीच मे नीद आ गई और बाबा भोलेनाथ कथा सुनाते समय भावसमाधि मे स्थिर हो गए थे और माता जी हूँ.. हूँ करती जा रही थी। उनके योग निद्रा में चलेजाने के बाद वंहा उपास्थि एक कबूतर जोड़ा उस कथा को सुनकर आगे हूँ.. हूँ.. करने लगा और कथा पूरी होने के बाद बाबा भोले नाथ ने आँख खोली तो देखे की माँ पार्वती जी योगनिद्रा में है तो हूँ.. हूँ.. किसने किया फिर कबूतर को देखा और वह कबूतर जोड़ा भी दिब्य स्वरूप हो गया। बताते है कि यह स्थान बहुत ही दुर्लभ था यंहा पहुँचना उस समय नमुमकिन था परंतु आज सभी लोगों के उस पवित्र गुफा के दर्शन हो जाते है जहाँ भगवान शिव का लिंग गुफा के अंदर वर्फ़ से बनता है।



आज सुरक्षा के इंतजामात भारत सरकार की तरफ से बहुत ही जबरदस्त है चप्पे चप्पे में फोर्स तौनत है यात्रियों की सुरक्षा और सहयोग के लिए अमरनाथ श्राइनवोर्ड की देखरेख में सभी यात्री पंजियांन कराकर अपना आईडी कार्ड प्राप्त कर आगे की यात्रा प्रारम्भ करते है। यात्रा के नियमों का पालन करना सभी यात्रियों के लिए अनिवार्य है।

जय बाबा अमरनाथ.. सभी की यात्रा मंगलमय हो सभी दर्शनार्थी यात्री सकुशल अपनी यात्रा पूरी कर वापस अपने अपने घर पहुँचे,यही सबकी बाबा अमरनाथ जी से प्रार्थना है।
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