*कीर्तन में उत्सव भाव से नाचना, अपने होने को मिटा देना, निराकार में एकाकार होजाना ही, 'ध्यान' का एक सरल उपाय है।*
*बिलासपुर-- ओशोधारा नानक धाम (मूरथल), की संस्कृति, परम गुरु ओशो की कृपा, सद्गुरु श्री सिद्धार्थ औलिया जी के परम ज्ञान व आशीर्वाद से हमारे छत्तीसगढ़ के सेंट्रल क्वार्डिनेटर आचार्य दर्शन जी (डॉ. प्रभाकर दर्शन जी) के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में ओशोधारा के सन्यासी उत्तरोत्तर ध्यान साधना में आगे बढ़ते जा रहे है,और एक स्वस्थ आनंदित, गुरुमुखी सामाजिक संस्कृति का विकास हो रहा है।*
*वर्ष 2021 के अंतिम दिनो एवम वर्ष 2022 के आगमन की अगवानी में आचार्य श्री दर्शन जी ने अपने कर्मस्थली जहाँ आप हिंदी साहित्य के प्रोफेशर पद पर होते हुए बच्चों को गढ़ने की नई ऊंचाइयां तय कर रहे है। वंही ओशोधारा के कर्म परायण सन्यासियों के साथ आध्यत्मिक पिकनिक के माध्यम से ध्यान की आनंदित रहने की कला को सहज में सिखाया।*
*करतला की हरी भरी बादियों, घने जंगलों में पहाड़ों के बीच से अपना रास्ता बनाते हुए कल कल करती हुई सरिता ( तुर्री ) के मनोरम नयनाभिराम शीतल पवित्र जल में जल क्रीड़ा.. वाटर डांस.. करवा कर भजन संगीत कीर्तन के हृदय स्पर्शी संगीत में जल उत्सव सन्यासियों को कराकर आत्म बिभोर कर दिया। सभी ने संगीत में झूम झूम कर नाच कर उत्सव मनाकर अपने न होने का अहसास किया और निराकार में एकाकार हो गए। न किसी को कड़कड़ाती ठंढ का एहसास हुवा न ही नदी के शीतल जल का और न ही संसार का और न ही समय का..सायद ऐसी दशा ओशोधारा के एक ध्यानी साधक की ही हो सकती है।*
*ओशो धारा के सन्यासियों ने जल में उत्सव के साथ इस वाटर थिरैपी ट्रीटमेंट का भी गुरु कृपा से लाभ उठाया जो प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए शरीर के लिए आवश्यक है।...*
*अंत मे सभी ने इस आध्यत्मिक पिकनिक में एक साथ इस पवित्र प्राकृतिक अलौकिक स्थल पर बैठ कर भोजन किया सभी के घरों से बनकर आये पकवानों, अम्रत तुल्य भोजन का सद्गुरु की कृपा से अपने प्यारे आचार्य श्री दर्शन जी के साथ बैठ कर भोजन प्राप्तकर आनंद लिया। इसके बाद आचार्य श्री के निवास स्थान में सभी ने आचार्य श्री प्रभाकर दर्शन जी से साधना ध्यान समाधि आनंदित उत्सवमय जीवन जीने का रहस्य सुना व समझा। आचार्य श्री ने कहा कि भक्ति मार्ग भजन कीर्तन उत्सव से आगे बढ़ने वाले सन्यासी इस ध्यान साधना के परम रहस्य को सद्गुरु की कृपा से जल्दी समझते है और उस परमतत्व का निराकार गोविंद का शून्य एवम ओंकार का अनुभव करते है।*
*इस आध्यात्मिक पिकनिक की आवस्यकता समय के अनुसार ओशो धारा के सन्यासियों को इस तरह के ट्रिप से भी तरासने का काम छत्तीसगढ़ के जौहरी आचार्य दर्शन जी (डॉ प्रभाकर दर्शन जी) ने करने की नायाब कार्यशाला आध्यत्मिक पिकनिक का निर्माण किया है जिसके रिजल्ट भी दिखने लगे है।*
*इस आध्यत्मिक पिकनिक में मां बंदना जी, मां सलूजा, मां पिंकी, मां अनिता गुप्ता, मां पूजा सलूजा,मां गुरमीत, मां आरती, मां उपाध्याय, मां मीनू शर्मा, मां आकांक्षा गुप्ता, मां नीलू, मां शिवकुमारी, मां नियती, मां आरती, प्रभुनूर, मोनल, नित्या गुप्ता, अपर्णा गुप्ता, स्वरा गुप्ता, स्वामी अश्वनी, स्वामी नवीन गुप्ता, स्वामी मुकेश, प्रशांत गुप्ता, स्वामी पवित,सिद्धार्थ गुप्ता, सहित कई साधक सम्मलित होकर आध्यात्मिक पिकनिक का आनन्द लिया।*

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