आज के दिन.. हल से जोती गई.. धरती से उत्पन्न अन्न को.. माताएं नही खाती है।
इंडिया क्राइम न्यूज़
कोटा-- आज श्री कृष्ण के बड़े भ्राता श्री बासुदेव और माता रोहणी के पुत्र के रूप में शेषनाग जी बलराम के रूप में जन्म लिए थे। बहुत बल साली और गर्म स्वभाव के थे । श्री कृष्ण दाऊ भी कहते थे।

इस से जुड़ी कई कथाएं है हल खष्ठी माता को धरती का स्वरूप माना जाता है। इस लिए अपने संतान और पुत्रों की रक्षा के लिये माताएं ब्रत रखती है और सुबह से ही महुआ पेढ के डाल की दातून करती है। और फिर दोपहर में परसा,कुशा, बांस को एक साथ बांध कर एक सगरी या तालाब घर के आंगन में बनाती है और एक छोटा सा हल रखती है फिर इसकी पूजा करती है।
महुआ, कुढ़वा, लाई, चना,मेवा, का चढ़ावा चढ़ाती है भोग लगाती है। और बच्चों की पुस्तक,पेन,कॉपी,खेलौनों को भी पूजा स्थल में रखती है। कलस रख कर पूजा करती है औऱ अपने संतानों के दीर्घायु होने की प्रार्थना हलछठ माता से करती है।
और सगरी के जल से बच्चों का मुंह धोती है और पीठ में लगा कर सवस्थ,दीर्घायु रहने का आशीर्वाद देती है।
आज के दिन ब्रती माताएं भैस का दूध और उसी का दही इसी दूध से बनी चाय लेती है साथ ही महुआ, और इसी की खीर को अपने उपवास के भोजन में लेती है।
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कोटा-- आज श्री कृष्ण के बड़े भ्राता श्री बासुदेव और माता रोहणी के पुत्र के रूप में शेषनाग जी बलराम के रूप में जन्म लिए थे। बहुत बल साली और गर्म स्वभाव के थे । श्री कृष्ण दाऊ भी कहते थे।

इस से जुड़ी कई कथाएं है हल खष्ठी माता को धरती का स्वरूप माना जाता है। इस लिए अपने संतान और पुत्रों की रक्षा के लिये माताएं ब्रत रखती है और सुबह से ही महुआ पेढ के डाल की दातून करती है। और फिर दोपहर में परसा,कुशा, बांस को एक साथ बांध कर एक सगरी या तालाब घर के आंगन में बनाती है और एक छोटा सा हल रखती है फिर इसकी पूजा करती है।
महुआ, कुढ़वा, लाई, चना,मेवा, का चढ़ावा चढ़ाती है भोग लगाती है। और बच्चों की पुस्तक,पेन,कॉपी,खेलौनों को भी पूजा स्थल में रखती है। कलस रख कर पूजा करती है औऱ अपने संतानों के दीर्घायु होने की प्रार्थना हलछठ माता से करती है।
और सगरी के जल से बच्चों का मुंह धोती है और पीठ में लगा कर सवस्थ,दीर्घायु रहने का आशीर्वाद देती है।
आज के दिन ब्रती माताएं भैस का दूध और उसी का दही इसी दूध से बनी चाय लेती है साथ ही महुआ, और इसी की खीर को अपने उपवास के भोजन में लेती है।
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