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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का जन्मोत्सव आज 6 सितम्बर को सगुण उपासक,गृहस्थ,और भक्तगण,बड़े ही धूम धाम से मनाएंगे..आज ही है सभी शुभ संयोग।

इस वर्ष दो दिन मनाएंगे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव।

इंडिया क्राइम न्यूज़



बिलासपुर/कोटा--- जगत के मंगल के लिए भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन 6 सितंबर  दिन बुद्धवार को रात में 12 बजे  रोहाणी नक्षत्र की बेला में  कृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

जयंती मुहूर्त भी पच्चीस से तीस वर्षों में एक बार आता है।जो सारे शुभ मुहूर्तों के साथ इस बार पड़ रहा है। कुछ वैष्णव सम्प्रदाय के और निर्गुण उपासक कल 7 सितंबर को उदयातिथि अष्टमी की मानते हुये ब्रत पूजा करेंगे जन्माष्टमी उत्सव मनाएंगे।

श्री कृष्ण बलराम के छोटे भ्राता है और भगवान विष्णु ने द्वापर युग के अंत मे श्री कृष्ण के रूप में बासुदेव और माता देवकी के गर्भ से  अपने मामा कंश के कारागृह में प्रगट हुए थे। इनकी बहेन भी जन्मी थी कंश ने धरती पर पटक कर मारने की कोशिश की तो आकाश मार्ग में उड़ गई और वो बिंध्याचल में विन्ध्यवासिनी के रूप में स्थापित हो गई।

और कृष्ण को वासुदेव ने गोकुल में नंद बाबा के यंहा रात में यमुनापार कर छोड़ कर आये थे।तभी से कंस भयभीत था अपनी बहन के सभी संतानों को मार डाला कृष्ण अपने दुराचारी मामा कंस का बध मथुरा जा कर किया और जनता को उसके अत्यचार से मुक्त किया इसके पहले सभी महाबली राक्षसों को मारा चाहे वह पूतना हो तृणावर्त, वकासुर,अघासुर, हो और बचपन मे ही शापित नल कूबर का उद्धार किया, खेल ही खेल में यमुना में आतंक का पर्याय बन गए कालिया नाग का मान मर्दन कर उसको यमुना से समुद्र में भेजा।

कृष्ण लगभग 125 वर्षों तक राज्य किया या इस धराधाम में रहे ऐसी मान्यता है कि कृष्ण जी ने जब सरीर का त्याग किया तो उसी समय से कलियुग के आगमन हुआ।

श्री कृष्ण महान कर्मयोगी,महान ऋषि, और महान योद्धा है।अपने धर्म की रक्षा के लिए महाभारत के युद्ध मे पांडवों के सार्थी बन कर बड़े बड़े महान योद्धाओं कृपा चार्य, द्रोणचार्य, भीष्मपितामह, कर्ण जैसे महापराक्रमी योद्धाओं का अधर्म का साथ देने वाले सभी का संघार करवाया।

भारत मे श्री कृष्ण जन्माष्टमी बड़े ही धूमधाम से घर घर मनाई जाती है।लोग दिन भर उपवास रहकर जगत के आधार कृष्ण को स्मरण करते है और बिधि बिधान से रात्रि बारह बजे शुभ मुहूर्त में जन्मोत्सव मनाते है। फिर पारण करते है।मथुरा में भी बांके बिहारी  जी की भब्य झांकिया आज भी द्वापर की याद दिलाती है।

भक्त अपने एवम अपने परिवार के कल्याण तथा मंगल के लिए पूजा अर्चना करते है साथ ही पूरे भारत सहित विश्व मे अमन शांति खुशहाली, प्रेम भाईचार बना रहे इसकी भी कामना और मुद मंगल कामना अखिल ब्रम्हांड नायक श्री हरि गोविंद से करते है।
मंगलम भगवान विष्णु.. मंगलम गरुणाध्वजः,.. मंगलम पूंडरीकाक्षय.. मंगलाय तनो हरि।

और भक्त यह भी कामना करते है कि--
सर्वे भवन्तु सुखिनः..सर्वे संतु निरामया.. सर्वे भद्राणि पश्यन्तु..मा कश्चित दुःख भागभवेत।

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