*बिलासपुर---कोरबा/कटघोरा:-* कटघोरा वनमंडल में कराए गए विभिन्न वानिकी व निर्माण कार्यों में सामाग्री उपयोग के भुगतान को लेकर वनमंडलाधिकारी के अड़ियल रवैये से त्रस्त स्थानीय कॉन्ट्रेक्टर और सप्लायरों द्वारा अपने लंबित भुगतान की राशि पाने बिलासपुर (शहर) विधायक का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जहां विधायक द्वारा बिलासपुर सीसीएफ से चर्चा करने उपरांत लंबित राशि भुगतान प्रकरण का जल्द निबटारा करने फिलहाल आश्वासन मिला है।
ज्ञात हो कि कटघोरा वनमंडल के विभिन्न परिक्षेत्रों में महीनों पूर्व कराए गए अनेकों निर्माण कार्यों के लिए निर्माण सामाग्री के अलावा मिक्सर मशीन, वायवेटर मशीन, डीजल पंप, पानी टेंकर एवं सेटरिंग सामान स्थानीय कॉन्ट्रेक्टर एवं सप्लायरों द्वारा किराया पर प्रदाय किये गए थे। जिसका भुगतान आज पर्यन्त लंबित है। जहां राशि पाने डीएफओ श्रीमती शमा फारुखी से अनेकों बार मौखिक निवेदन किया गया तथा पत्राचार के माध्यम से भी ध्यानाकर्षण कराया गया किंतु डीएफओ भुगतान मामले को लेकर गंभीर नही हुई बल्कि वर्कआडर नही होने का हवाला देकर भुगतान अबतक रोके रखा। बिगड़ते हालात से गुजरते कांट्रेक्टर व सप्लायरों ने जिले के जनप्रतिनिधियों से भी भुगतान कराने की गुहार लगाई लेकिन जनप्रतिनिधि भी भुगतान नही करा सके, या यूं कहें कि अनदेखा कर गए। और अततः डीएफओ के अड़ियल रवैये से त्रस्त होकर 12 अगस्त को वनमंडल कार्यालय के सामने सपरिवार आमरण- अनशन का फैसला लिया। तथा बीते बुधवार 11 अगस्त को वे सभी बिलासपुर विधायक शैलेश पांडेय से भेंट करने पहुँचे व अपनी समस्या से उन्हें अवगत कराते हुए आंदोलन करने की बात भी बताई। जहां विधायक श्री पांडेय ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रख बिलासपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक शुजाउद्दीन नावेद से मोबाइल पर चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी दी तथा भुगतान को लेकर आवश्यक समाधान निकालने के निर्देश दिए। जहां मुख्य वन संरक्षक द्वारा कटघोरा डीएफओ से चर्चा कर लंबित राशि भुगतान का निबटारा जल्द किये जाने की बात कही गई। विधायक श्री पांडेय द्वारा कांट्रेक्टर व सप्लायरों से किसी भी तरह के आंदोलन, अनशन नही करने की अपील की गई है और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि लंबित राशि के भुगतान में अतिशीघ्र सहयोगात्मक रवैया अपनाते हुए समस्या का समाधान किया जाएगा। फिलहाल विधायक के पहल एवं सीसीएफ के आश्वासन पश्चात प्रस्तावित अनशन आगामी रक्षाबंधन तक के लिए टाल दिया गया है। लेकिन यदि वनविभाग भुगतान को लेकर उदासीन रहता है तो रक्षाबंधन के बाद वनमंत्री व मुख्यमंत्री से भेंट करने के साथ व्यापक स्तर पर आंदोलन के साथ वनमंडल का घेराव करने की बात कांट्रेक्टर और सप्लायरों ने कही है। देखना है कि अड़ियल डीएफओ द्वारा ठेकेदार, आपूर्तिकर्ताओं के लंबित राशि का भुगतान किया जाता है या फिर "मेरी मुर्गी की एक टांग" वाली परंपरा को कायम रखते हुए अडिग रहती है..?

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