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आज महासत्संग में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में करीब 5000 से जायदा लोगों ने पूरे देशभर से भाग लिया ।

इंडिया क्राइम न्यूज


​​​​​​दिल्ली:-- इस अवसर पर समर्थगुरु श्री सिद्धार्थ औलिया जी ने कहा ओशो की धर्म दृष्टि को 8 बिंदुओं से समझा जा सकता है वैसे भी भारत में 8 का अंक बड़ा महत्वपूर्ण है भगवान बुद्ध ने जो साधना की पद्धति दी उसे अष्टांगिक मार्ग कहा जाता है । 8 अंगो वाला मार्ग।

 
 
इसी तरह योगसूत्र के प्रणेता महर्षि पतंजलि ने जो मार्ग दिया वह अष्टांग योग कहलाता है। इसी तरह ओशो की धर्म दृष्टि को भी 8 बिंदुओं के अंतर्गत समझा जा सकता है ।
 
उक्त उद्गार समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने आज दिल्ली के तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में महासत्संग को संबोधित करते हुए प्रकट किया।
 
ओशो जन्मोत्सव सप्ताह के अवसर पर आयोजित इस महोत्सव को संबोधित करते हुए आगे उन्होंने कहा कि धर्म क्या है –जिस परम नियम से जीवन चलता है वह धर्म है. इसे ही संतो ने धर्म, ताओ या हुकुम भी कहा है।

 
सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए समर्थगुरु ने कहा कि सनातन धर्म का अर्थ है आदि धर्म
शाश्वत सत्य पर आधारित धर्म 
इसे वैदिक धर्म भी कहा जाता है
यह विश्व का प्राचीनतम धर्म है 
और सनातन धर्म का मूल तत्व ओंकार है जो हमारी आत्मा और अस्तित्व का संगीत है
ओम इसका प्रतीक है
 
सनातन धर्म के मुख्य ग्रंथों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वेद उपनिषद रामायण गीता महाभारत और संतमत के सैकड़ों संतों की वाणी इसमें समाहित हैं

सनातन धर्म के धर्मचक्र को भगवान शिव ने, भगवान राम ने, भगवान कृष्ण ने और भगवान बुद्ध के पश्चात ओशो प्रवर्तित किया।

 
ओशो की धर्म दृष्टि को समझाते हुए समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने कहा कि सनातन धर्म के चार घाट है– साक्षी, ध्यान, समाधि और सुमिरन 
ओशो की धर्म दृष्टि इन चारों घाटों को समाहित करती है।
 
उसे 8 बिंदुओं से समझा जा सकता है ।
पहला जोरबा द बुद्धा 
दूसरा विज्ञान और धर्म 
तीसरा विदेह गुरु और जीवित गुरु
चौथा ध्यान और प्रेम 
पांचवा समाधि और संबोधि
छठवां साक्षी और तथाता
सातवां ज्ञान और भक्ति 
और आठवां आनंद और उत्सव।
 
समर्थगुरु के प्रवचन के पश्चात आचार्य दर्शन ने ब्रह्मनाद ध्यान का प्रयोग कराया और सभा में विशिष्ट अतिथि के रुप में 
महायोगी महामंडलेश्वर पायलट बाबा ने भी लोगों को संबोधित किया ।
उन्होंने कहा कि धर्म का सार स्वयं में ठहरना है ।
गति से अगति में चलना ही धर्म के रहस्य को जानने का मार्ग है।
 
महासत्संग के दूसरे विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक डॉ. वेद प्रताप वैदिक जी ने ओशो के साथ अपने पुराने संस्मरण को बहुत रसपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया और उन्होंने ओशो की देशना और ज्ञान को आज के मनुष्य की आवश्यकता बताते हुए उस पर अलग-अलग आयामों से प्रकाश डाला।
 
इस कार्यक्रम में अनेक गणमान्य नागरिक सांसद और चर्चित व्यक्ति उपस्थित थे ।
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