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समुद्रतट पर.. शांत चित्त से.. चक्रमण सुमिरन करने से सहज ही प्रगाढ़ होती है..निरंकार, साक्षी की साधना....आचार्य दर्शन।

इंडिया क्राइम न्यूज़
  आर डी गुप्ता
 
पूरी-- आज जगन्नाथ पुरी में ध्यान एवं सुरती समाधि के प्रथम दिन के अवसर पर समर्थ गुरु सिद्धार्थ औलिया जी के सानिध्य और आशीर्वाद से आचार्य डॉक्टर प्रभाकर दर्शन जीने सुरती समाधि के साधकों को सहज ही निरंकार ओंकार सदा साक्षी भाव में रहकर सुमिरन करने की विधाओं को बताया समझाया और सुमरन योग की कला के माध्यम से सभी को साधना सिखाई साथ ही उन्होंने कहा की शांत चित्त से समुद्र के किनारे उसकी विशाल लहरों और सन्नाटे की ध्वनि को लहरों के कलरव को महसूस करने से ठंडी रेत में चक्रमण सुमिरन करने से निरंकार साक्षी ओंकार की साधना सहज ही प्रगाढ़ हो जाती है


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