पुरी--आज के ध्यान समाधि कार्यक्रम में समर्थगुरु ओशो सिद्धार्थ औलिया जी ने निराकार का ध्यान,नाद श्रवण साक्षी भाव मे रहना, सुमिरन में जीने, के गूढ़ रहस्यों को सरलतम ढंग से बताया,फिर तथाता ध्यान के बारे में तथाता क्या है सभी सन्यासियों, से पूछा, विद्वान आचार्यो में प्रभाकर दर्शन जी,कर्नल अनुतोष जी , आचार्य रचना मां , ने भी तथाता के संबंध में अपने अनुभव के आधार पर उत्तर दिया, फिर बड़े ही सहज भाव से करुणा के सागर समर्थगुरु ने संत कबीरदास जी तुलसीदास जी की लिखी हुई बातों का अपने पैमाने में उतार कर उदाहरण दे कर समझाया।
उत्सव आनंद के साथ साधको ने अपने समर्थगुरु के साथ एकाकार होने की कोशिश की फिर साम को समर्थगुरु अपने सभी सन्यासियों,आचार्यों, और गुरु मां के साथ भगवान जगन्नाथ जी के दर्शन किये वँहा भी जगन्नाथ मंदिर प्रांगड़ में ओशो सन्यासियों ने अपने समर्थगुरु के प्यार में कीर्तन भजन कर उत्सव मनाते हुए जगन्नाथ जी के दर्शन किये फिर महाप्रसाद का सभी ने रसास्वादन लिया।
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