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संतों की तपोभूमि पुरी मे.. संतशिरोमणि समर्थ गुरु सिद्धार्थ औलिया जी के सानिध्य में.. ध्यान एवम सुरती समाधि एवम परमतत्व को जानने की विधा का .. हुआ भब्य शुभारंभ उद्घाटन ..

मध्यान्ह काल मे ओशोधारा मैत्री संघ छत्तीसगढ़ की तरफ से.. समर्थगुरु की आरती के साथ हुई थी कार्यक्रम की सुरुआत।
 
होटल एम्पायर में होगा अलौकिक सुरती, ध्यान,समाधि,परम तत्व, की खोज का आयोजन..समर्थगुरु की बरसेगी अमृतमयी करुणा,कृपा।

इंडिया क्राइम न्यूज
 आर डी गुप्ता
 
जगन्नाथपूरी--- आज समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी के साथ उनके सनिध्यमयी करुणा सागर में स्नान करने के लिए सागर तट पर तपस्या साधना करने देश के कई राज्यों से बड़ी संख्या में ओशो सन्यासी,और प्यार, ममता, करुणा, कि प्रतिमूर्ति मातृ शक्तियाँ पहुँची है।
 

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मुरथल ओशो धारा नानकधम से सबके प्राणों से प्यारे समर्थगुरु दिब्य अलौकिक,शक्तियों से परिपूर्ण, करुणा का सागर जिनके हृदय में अपने प्यारे सन्यासियों के लिए हिलोरें मरता रहता है। ऐसे महान कर्मयोगी सिद्धार्थ औलिया जी के सानिध्य में यह कार्यक्रम हो रहा है।
 
जिसमे परम आचार्यगण प्रभाकर दर्शन जी,अनुतोष शर्मा जी,अमरेश झा जी,एवम अन्य विद्वान आचार्य गणों की गरिमामयी उपथिति में 6 दिवसीय आयोजन हो रहा है।


मध्यान्ह काल में समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया सरकार के आचार्य प्रभाकर दर्शन जी संतोष चंद्र जी ने चरण पखारे और उसके बाद श्रद्धालु माताओं ने आरती की उत्सव मनाया। सभी ने समर्थ गुरु की ऊर्जा भारी नजारों से बरसती कृपा का अनुभव किया।

 
साम 7 बजे से समुद्र तट पर बने होटल एम्पायर में उद्घाटन सत्र में प्यारे समर्थ गुरु ने परमगुरु ओशो और भगवान जगन्नाथ जी के चित्र के सामने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया,संचालन आचार्य श्रेष्ठ प्रभाकर दर्शन जी ने किया,आचार्य कर्नल अनुतोष जी ने भी ओशो सन्यासियों को संबोधित किया।आचार्य अमरेश झा जी भी उपस्थित रहे।

 
समर्थ गुरु ने जगन्नाथ पुरी और समुद्र की महिमा अपने साधको को बताते हुए कहा कि इस परम स्थान में परमात्मा,भगवान, परमतत्व को खोजने अनेको सन्यासी, ज्ञानी,साधु,और संत आये है,संत कबीरदास जी,गुरु नानकदेव जी, भीखूदास जी,संत पलटू, और स्वयं मैं भी 25 वर्ष बाद आया हूँ पूरी,और बुद्धत्व को प्राप्त करने संत बनने के बाद पहली बार पूरी अपने 200 से अधिक सन्यासियों शिष्यों के साथ उन्हें उस ओंकार सतनाम परमात्मा, परमतत्व भगवान,की भगवत्ता का अनुभव कराने आया हुँ, जंहा पहले कभी नारिहर दास जी जैसे कई संत अपने दस बारह शिष्यों के साथ आते थे,फिर भी उस तत्व को नही जान पाए जिस तत्व को मात्र 6 दिन में यंहा अनुभव के माध्यम से करा दिया जाएगा। आप सभी को आज पर जीना है आनंदित रहने के संकल्प लेना है,कल आया नही..जो गुजर गया वो आएगा नही इसलिए बर्तमान में अपने होने का साधना, ध्यान,सुरती समाधि का आनंद ले।
 
इस पूरे आयोजन को स्टेट क्वार्डिनेटर संतोष चंद्रा जी,आचार्य अमरेश झा जी, डा. के आर सिंह जी एवम अन्य सहयोगियों,ओशो के सभी प्यारे सन्यासियों, के मेहनत से आचार्य प्रभाकर दर्शन जी,आचार्य कर्नल अनुतोष जी के कुशल मार्गदर्शन और समर्थगुरु के आशीर्वाद से इतना अच्छा आयोजन सम्पन हो रहा है।
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