गुरु नानक देव जी ने इसके पूर्व में इसी समुद्र के किनारे निरंकार महा आरती की थी।
इंडिया क्राइम न्यूज़
आर डी गुप्ता
पुरी-- प्यारे समर्थ गुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने जगन्नाथपुरी में ओशोधारा नानक धाम संघ के तत्वाधान में छह दिवसीय ध्यान समाधि , सुरती समाधि का आयोजन किया गया है। इस आयोजन के मध्य एक दिन जगन्नाथ भगवान के दर्शन दूसरे दिन समुद्र तट के किनारे निरंकार आरती अपने 200 से अधिक साधकों के साथ किया साम के समय में समुद्र के किनारे दीपों की जगमगाहट से सारा वातावरण जगमगा उठा।
आचार्य प्रभाकर दर्शन जी ने गुरु नानक देव जी के द्वारा की गई निरंकार आरती के बारे में बताया उस समय जो आरती की गई थी उनकी पंक्तियों को गाकर के सुनाए एवं उसके अर्थ को भी साधक गणों को बताया ओंकार के मसीहा गुरु नानक देव जी अपने ओंकार शिक्षा का दान देने वाले गुरु कबीरदास जी साहब को खोजते खोजते यहां पहुंचे थे लेकिन जब वह पहुंचे तो कबीरदास साहब जगन्नाथ पुरी से जा चुके थे तब गुरु नानक देव जी अपने शिष्य मर्दाना के साथ कुछ दिन यहां रुक गए और मंदिर में आरती करने नहीं गए , एक दिन राजा ने उनसे कहा कि आप उत्तम संत हैं आप जगन्नाथ मंदिर में आरती करने क्यों नहीं जाते तब नानक देव जी ने राजा से कहा आइए हम आपको निरंकार आरती का दर्शन कराते हैं ।
बताते हैं कि नानक देव जी ने जब आरती करना शुरू किया तो उन्होंने भाव सहित राजा को बताया यह पूरा गगन आरती की थाल है सूरज और चंद्रमा यह दो दिए हैं असंख्य तारे यह फूलों की तरह जगमगा रहे हैं और इस निराकार में जो ओंकार नाद गूंज रहा है उसका स्वरूप निरंकार है, उसका नाम निरंकार है और वही निरंकार सर्वव्यापी है घट घट वासी है और वही सभी में आत्मा बनकर समाया हुआ है इसलिए राजन यह सबसे बड़ी महाआरती है इसी महाआरती को आज ओशोधारा के महान संत समर्थ गुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने अपने साधक सन्यासियों को बताया और समुद्र के किनारे शाम को प्रयोग करके दिखाये, इसके बाद उत्सव के साथ उस निरंकार का धन्यवाद दिया गया ।

इस अवसर पर आचार्य श्रेष्ठ प्रभाकर दर्शन जी, आचार्य अनुतोष शर्मा जी, आचार्य अमरेश झा जी, मां रचना जी , समर्थ गुरु की सेक्रेटरी मां मीराबाई जी, स्टेट कोऑर्डिनेटर छत्तीसगढ़ के संतोष चंद्रा जी, छत्तीसगढ़ मीडिया प्रभारी आर डी गुप्ता जी, के आर सिंह जी, सुशील जी मीडिया प्रभारी मुरथल और बहुत सारे सन्यासी साधक और माताएं बच्चे इस आयोजन में शामिल रहे यह आरती महा आरती देखने का सौभाग्य नानक देव जी के समय के बाद आज उसी क्षेत्र में ओशो सन्यासियों को मिला है यह बहुत ही सौभाग्य की घड़ी है।
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