breaking post New

सागर की लहरों के बीच.. आज सुबह दो सूर्यों का हुआ उदय..।

इंडिया क्राइम न्यूज़
   आर डी गुप्ता
पुरी... -- तम नासक सूर्य के उदय के साथ साथ ही आज पुरी सागर विच में भ्रम,भव, अज्ञानता नासक परमगुरु ओशो की अंतर यात्रा ध्यान की ऊर्जा से उदित एक प्रकाश पुंज समर्थ गुरु सिद्धार्थ औलिया के रूप में उदय होकर सन्यासियों, साधकों के साथ सागर की विशाल लाहरों के शोर को भी अपने आनंद,उमंग,भक्ति की कला से सान्त कर दिया,

 
 सिर्फ सुबह के वो छण सन्यासियों के साथ साथ सागर के लिए भी अविस्मरणीय, अकल्पनीय,पल हो गये, समय का पता ही नही चला.. ऐसा लग रहा था मानो सूर्य देव इस दिव्य चेतना,करुणा के सागर,ब्रम्हनाद के अमृतमयी रस के स्वाद से अपने साधको सहित सरलतम ढंग से उस परम अलौकि ब्रम्ह बिद्या से दुनिया को परचित कराने वाले त्यागी शक्तिपुंज ह्रदय के सम्राट ओशो सिद्धार्थ औलिया जी से मुलाकात,प्रश्नोत्तर के लिए ठहर गए थे।
 

यह वाकिया आज का है.. जब यह धरातल पर भक्ति ज्ञान साधना, आनंद उमंग की अद्भुत खगोलीय घटना घटी, इस घटना को देख कर सागर की लाहरों ने भी लम्बी..गहरी सांसें लेकर शांत होने लगी थी,जब सुबह अचानक.. समर्थ गुरु अपने प्यारे साधको को सागर की गोद मे भ्रमण करते देखा तो वँहा ऐसे पहुचे मानो अंतर आकाश से निरंकार स्वरूप कोई सूर्य के समान प्रकासित तेज पुंज वँहा पहुँच गया हो, और साधको के साथ सूर्य भी उस लीला को देखने के लिए रुक गए हों, फिर आनंद,भक्ति, का जो सागर उमड़ा की आनंद की उठी विशाल लाहरों के शोर के आगे सागर ने भी अपनी लहरों के शोर को दबाकर मानो भक्ति की सक्ति के आंनद का अनुभव करने लगा हो।

 
फिर क्या था सागर की लाहरों के बीच साधक साधिकायो ने अपने प्यारे समर्थ गुरु के प्यार में महारासलीला की क्रीड़ा की, उसे देखने के लिए कई दैवी शक्तियाँ वँहा उपस्थित हो कर महारास में शामिल हुई।
Get Loan

Comments