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पुलिस अधीक्षक के निजात अभियान से .. नशे के कारोबारियों एवम नशे से होने वाले अपराधों पर.. अंकुश तो जरूर लगेगा..पर कुछ पुलिस कर्मियों के ऊपर.. पकड़ने- छोड़ने के खेल में .. रुपये लेने के लग रहे ..गंभीर आरोप..बन रहा जाँच का विषय।

निजात अभियान बना कुछ पुलिस कर्मियों की अवैध कमाई का जरिया.. अभियान की धौंस में जिले में चल रहा वसूली का खेल। लग रहे रुपये मांगने के आरोप।

इंडिया क्राइम न्यूज़
 
बिलासपुर -- जिले के नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह ने कार्यभार ग्रहण करने के कुछ ही दिनों के भीतर नशे से होने वाली बर्बादी के खिलाफ निजात अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अभियान के तहत जिले के सभी पुलिस थानों में सकारात्मक तरीके से नशे का अवैध कारोबार करने वालों पर शिकंजा कसते हुए उनकी धरपकड़ की जा रही है।
 
निजात अभियान के तहत जिले के पुलिस महकमे को अपेक्षित सफलता भी मिल रही है। परंतु कुछ थाना क्षेत्र में निजात अभियान को जरिया बनाकर अवैध वसूली का खेल भी पुलिसकर्मियों द्वारा खेला जा रहा है। सोमवार को गनियारी निवासी उमेंद्र वर्मा के परिजनों ने कोटा पुलिस पर युुवक को छोड़ने के एवज में एक लाख रुपए मांगने का आरोप लगाकर इस बात को साबित कर दिया है। क्योंकि तीन चार दिन पहले शराब के आरोप में पकड़ कर जेल भेजे गए आरोपी की जेल में दूसरे दिन जेल अभिरक्षा में मौत हो गई, जबकि जेल में मेडिकल चेकअप भी होता है फिर अचानक हुई मौत अस्पताल भेजना परिजनों के किसी गहरे सक को मजबूत करता है। फिर कलेक्ट्रेट, के सामने चक्काजाम जैसे हालात हो गए वही हालात गनियारी में भी देखने को मिले,और फिर पुलिस पर रुपये मांगने के संगीन आरोप भी लगे, क्योकि बिना आग लगे - धुंआ नही निकलता कुछ तो बीच मे है जो पुलिस अधीक्षक महोदय को संकेत कर रहा है कि यँहा एक जांच जैसा मामला बन रहा है, इतने अच्छे निजात अभियान को ऐसे लोग दज्जियाँ न उड़ा दे। इस लिए पारदर्शिता और अंकुश जरूरी है।
 
हम आपको बता दें कि पिछले दिनों बेेलगहना चौकी क्षेत्र के एक युवक को महज 2 लीटर महुआ शराब के साथ पकड़ कर उससे भी छोड़ने के एवज में बेलगहना पुलिस चौकी के द्वारा पचास हजार की मांग की गई थी। मीडिया द्वारा इस बात का खुलासा कर दिए जाने के बाद जैसे-तैसे मामला रफा-दफा कर दिया गया। 
 
कुछ इसी तरह की शिकायतें पचपेढी थाना क्षेत्र और सीपत थाना क्षेत्र से भी सामने आई है जिसमें पुलिस कर्मियों द्वारा लोगों को नशे के सामान के साथ पकड़ कर छोड़ने के एवज में पैसों की मांग की गई है।
 
बहरहाल पुलिस कप्तान संतोष सिंह को इस ओर गंभीरता से ध्यान देकर मातहत कर्मचारियों को वसूली का खेल बंंद करने का सख्त निर्देश देना चाहिए, ताकि निजात अभियान की आड़ में पुलिसकर्मी इस तरह मासूम और निरपराध लोगों को अपनी वसूली का शिकार ना बना सके।
 
पुलिस अधीक्षक के निजात अभियान को तभी सामाजिक और कानूनी सफलता मिल सकती है जब पुलिस समाज के लोगों को नशे की बुराइयों के विषय में जागरूक कर ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करें। निजात अभियान का लक्ष्य लोगों को और समाज को नशे की बुराइयों से बचाना है, लिहाजा आम जनता और जनमानस को भी इस अभियान से जोड़ते हुए इसकी सफलता सुनिश्चित की जा सकती है।समय समय पर पुलिस,प्रसाशन की तरफ से इस दिशा में प्रयास किये जा रहे है।
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