गुरू अम्रत तत्व है, गुरु ही नूर है।
इंडिया क्राइम न्यूज़
आर डी गुप्ता
मुरथल- सोनीपत--- गुरु बिन भवनिधि तराई न कोई, जौ बिरंचि शंकर सम होइ। गुरु के बिना इस भवसागर से पार कोई नही जा सकता चाहे देवता हो मनुष्य हो या फिर स्वयम ब्रम्हा जी शंकर जी ही क्यों न हों, गुरु की भूमिका जीवन मे बड़ी महत्वपूर्ण नाव है इस संसार सागर से पार जाने में और जीवन मे सफलताओं के शिखर पर पहुँच कर आनंदित रहने के लिए।

तभी तो गुरु और गोबिंद की तुलना एक साथ कि गई है। गुरु गोबिंद दोऊ खड़े काके लागूं पाँव.. बलिहारी गुरु आपने गोविंद दिओ बताय।
ग्रंथों में- तो कहा गया है कि गुरु ही साक्षात सगुन रूप शरीर में परम ब्रम्ह है। गुरु ब्रम्हा, गुरू विष्णु, गुरु देव महेश्वरः..गुरु साक्षात परमब्रम्ह..तस्मै श्री गुरवे नमः..तस्मै श्री गुरुवे नमः।।

ऐसे श्री गुरु चरणों मे कोटि कोटि प्रणाम।
हमारे ऐसे परमब्रम्ह स्वरूप समर्थ गुरु श्री सिद्धार्थ औलिया सरकार जी को गुरु पूर्णिमा के पावन गुरु पर्व पर बारम्बार प्रणाम..अहो भाव...हम सब पर गुरु कृपा अमृत रश की तरह बरसती रहे..जय समर्थ गुरु।
इस गुरु पर्व पर सेंट्रल क्वार्डिनेटर आचार्य दर्शन जी के मार्गदर्शन में ओशोधारा मैत्री संघ छत्तीसगढ़ की टीम के लगभग 50 साधक मुरथल समर्थ गुरु के श्री चरणों में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुचे है और आज गुरु भक्ति से संबंधित सद्गुरु के सामने अपने स्पेसल प्रोग्राम का प्रदर्शन कर गुरु पूर्णिमा पर्व को आनंदित बनाएंगे। आज आश्रम में भारत के कोने कोने से साधक समर्थगुरु के दर्शन करने पहुचे है।
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