breaking post New

करगीरोड कोटा फिरिगींपारा में रामचरित मानस का 41वें वर्ष में प्रबेश..बह रही राम रस की अमृत मयी धारा..कथा श्रवण करने पहुँच रहे धार्मिक श्रोता।

राम नाम की लूट है..लूट चहै सो लूट।
अंत काल पछतायेगा..प्राण जायेगे छूट।


इंडिया क्राइम न्यूज़

कोटा- फिरंगीपरा करगीरोड कोटा में श्री रामचरितमानस सम्मेलन का यह 41 वर्ष है ।करोना काल में भी सारे नियमों का पालन करते हुए इसे संचालित किया गया श्री रामचरित मानस सम्मेलन अखंड रूप से आज तक संचालित है जिसमें अखिल भारतीय स्तर के प्रकांड विद्वान अपनी गरिमामयी उपस्थिति से मंच को सुशोभित करते हैं। श्री रोहन सिंह जी ने भरत चरित्र की व्याख्या करते हुए बताया की भरत का चरित्र सागर की तरह है और लक्ष्मण जी का चरित्र आकाश की तरह है जो दृष्टिगत है दिखाई पड़ता है लेकिन सागर में क्या छुपा है दिखाई नहीं पड़ता मऊ उत्तर प्रदेश से पधारे हुए रितेश जी ने श्री रामचरितमानस ग्रंथ को त्याग का ग्रंथ बताया। मन चंचल है इसे रोका नहीं जा सकता बदला जा सकता है। भक्तों के अपार उमड़ते भीड़ के बीच अलीगढ़ से पधारे श्री रामकृष्ण मानस मित्र जी ने श्री रामचरितमानस के गूढ़ रहस्य की सुंदर व्याख्या की। राम जंगल में जाते हैं तो मंगल करते हैं। राम जी ने अंतिम आदमी की पीड़ा भी जानने का प्रयास किया तभी रामराज की स्थापना हुई। मानस की उपादेयता आज के संदर्भ में बहुत आवश्यक है। मानस प्रचार प्रसार समिति के अध्यक्ष संतोष अग्रहरी ने यह जानकारी उपलब्ध कराई।
Get Loan

Comments