ओशोधारा नानकधाम, मुरथल में छह दिवसीय संत समागम का भब्य आयोजन प्रारम्भ।
सभी सनातन धर्म के समर्थकों का एक मंच से हुंकार।
इंडिया क्राइम न्यूज़
बिलासपुर-- संत समागम का जबरदस्त आगाज.. ओशोधारा नानकधाम मुरथल में समर्थ गुरु सिद्धार्थ औलिया जी की ओर से छह दिवसीय संत समागम का शुभारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म के लिए यह संगठित होने का समय है। पहले दिन 1008 कृष्णानंद बाबा कालिदास ओशोधारा आश्रम मुरथल में पहुंचे।

इस दौरान संत टाट बाबा के शिष्य आचार्य शुभम आनंद, अंबाला के मोहड़ा धाम से स्वामी विकास दास जी, मुरादनगर के पावन चिंतन धारा आश्रम से गुरु पवन सिन्हा जी संत समागम स्थल मुरथल पहुँचें।ओशोधारा के आचार्यों वरिष्ठ साधकों ने संतों का स्वागत किया।

उपस्थित सभी संतों ने अपनी-अपनी साधना पद्धति, सनातन धर्म, बीसवीं शताब्दी के महान संत एवं दर्शनशास्त्री गुरु ओशो की देशना पर, अपनी अमृतवाणी से साधकों का मार्गदर्शन किया।

समर्थ गुरु सिद्धार्थ औलिया ने ओशोधारा नानकधाम में संत समागम के शुभारंभ पर मौजूद संत संवाद पर बताया कि यह संत समागम अपनी तरह का अनूठा आयोजन है, जो कि हरियाणा की धरती पर पहली बार किया जा रहा है यह कार्यक्रम हर वर्ष किया जाएगा।
वही अगले दिन भी संत समागम में--सनातन धर्म का मूल तत्व है ओंकार-- अपने उद्बोधन में समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने कहा कि ओंकार को जाने बिना कोई संत सनातन धर्म का सच्चा प्रहरी नहीं हो सकता। यह कहना है समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी का।

सोमवार को ओशोधारा नानकधाम मुरथल में संत समागम में उन्होंने कहा कि हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख सभी सनातन धर्म की शाखाएं हैं। इनका मूल तत्व ओंकार है । ओशोधारा के शिष्यों के लिए यह अति सौभाग्यशाली सप्ताह है। यहां 25 से 30 संत समर्थगुरु के आह्वान पर संत समागम में भाग लेने आश्रम आए हैं। इससे पूर्व बाबा कालिदास ने ओशो पर विचार रखते हुए उन्हें बीसवीं शताब्दी का महान क्रांतिकारी संत और दर्शनशास्त्री बताया।
संत समागम में ओशोधारा के वरिष्ठ साधक भी देश-विदेश से पहुंचे हैं। साथ ही नए साधकों ने ध्यान योग में भाग लिया।
इस संत समागम में आचार्य कुलदीप जी, सेंट्रल क्वार्डिनेटर आचार्य प्रभाकर दर्शन जी, आचार्य अमरेश झा जी, गोपाल जी, चेतन जी, डॉ. नरेश जी, महिला सशक्तिकरण समन्वयक रचना अग्रवाल,मां मीरा जी, मां अरुणिमा जी व रोहतक मंडल के समन्वयक संदीप नैन जी सहित आश्रम में ओशोधारा के लगभग 300 साधक सन्यासी उपस्थित रहे।
सभी सनातन धर्म के समर्थकों का एक मंच से हुंकार।
इंडिया क्राइम न्यूज़
बिलासपुर-- संत समागम का जबरदस्त आगाज.. ओशोधारा नानकधाम मुरथल में समर्थ गुरु सिद्धार्थ औलिया जी की ओर से छह दिवसीय संत समागम का शुभारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म के लिए यह संगठित होने का समय है। पहले दिन 1008 कृष्णानंद बाबा कालिदास ओशोधारा आश्रम मुरथल में पहुंचे।

इस दौरान संत टाट बाबा के शिष्य आचार्य शुभम आनंद, अंबाला के मोहड़ा धाम से स्वामी विकास दास जी, मुरादनगर के पावन चिंतन धारा आश्रम से गुरु पवन सिन्हा जी संत समागम स्थल मुरथल पहुँचें।ओशोधारा के आचार्यों वरिष्ठ साधकों ने संतों का स्वागत किया।

उपस्थित सभी संतों ने अपनी-अपनी साधना पद्धति, सनातन धर्म, बीसवीं शताब्दी के महान संत एवं दर्शनशास्त्री गुरु ओशो की देशना पर, अपनी अमृतवाणी से साधकों का मार्गदर्शन किया।

समर्थ गुरु सिद्धार्थ औलिया ने ओशोधारा नानकधाम में संत समागम के शुभारंभ पर मौजूद संत संवाद पर बताया कि यह संत समागम अपनी तरह का अनूठा आयोजन है, जो कि हरियाणा की धरती पर पहली बार किया जा रहा है यह कार्यक्रम हर वर्ष किया जाएगा।
वही अगले दिन भी संत समागम में--सनातन धर्म का मूल तत्व है ओंकार-- अपने उद्बोधन में समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने कहा कि ओंकार को जाने बिना कोई संत सनातन धर्म का सच्चा प्रहरी नहीं हो सकता। यह कहना है समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी का।

सोमवार को ओशोधारा नानकधाम मुरथल में संत समागम में उन्होंने कहा कि हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख सभी सनातन धर्म की शाखाएं हैं। इनका मूल तत्व ओंकार है । ओशोधारा के शिष्यों के लिए यह अति सौभाग्यशाली सप्ताह है। यहां 25 से 30 संत समर्थगुरु के आह्वान पर संत समागम में भाग लेने आश्रम आए हैं। इससे पूर्व बाबा कालिदास ने ओशो पर विचार रखते हुए उन्हें बीसवीं शताब्दी का महान क्रांतिकारी संत और दर्शनशास्त्री बताया।
संत समागम में ओशोधारा के वरिष्ठ साधक भी देश-विदेश से पहुंचे हैं। साथ ही नए साधकों ने ध्यान योग में भाग लिया।
इस संत समागम में आचार्य कुलदीप जी, सेंट्रल क्वार्डिनेटर आचार्य प्रभाकर दर्शन जी, आचार्य अमरेश झा जी, गोपाल जी, चेतन जी, डॉ. नरेश जी, महिला सशक्तिकरण समन्वयक रचना अग्रवाल,मां मीरा जी, मां अरुणिमा जी व रोहतक मंडल के समन्वयक संदीप नैन जी सहित आश्रम में ओशोधारा के लगभग 300 साधक सन्यासी उपस्थित रहे।
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