डी एफओ श्री कुमार निशांत जी ने इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए.. असल किरायेदार को भी खोज कर पीओआर सम्मन जारी कर आरोपी बनाने का दिया था मातहत कर्मचारियों को निर्देश..पर जाँच अधिकारी सब जानते हुए भी बन रहे अनजान..लीपापोती का जनता लगा रही आरोप।
मकान किसी का ,,किराएदार कोई और लेकिन वन विभाग की जांच के दायरे में कोई और ।
वन विभाग जिसे पेश करने की तैयारी कर रहा वो किराएदार है या नहीं इस पर विभाग को संशय ।
रेंजर को मकान मालिक ने कहा हास्पीटल में हूं लेकिन किराएदार का नाम नहीं बताया ।
इंडिया क्राइम न्यूज़
बिलासपुर-- कोटा वन विभाग की एक तेज तर्रार टीम ने कोटा के फ़िरंगिपरा श्री दिनेश पांडे के मकान से 13/5/23 को बड़ी मात्रा में सागौन की लकड़ी और उससे बन रहे फर्नीचर को जप्त किया था । ये पुरानी बात हो गई है नई मजेदार बात ये है कि इस तेज तर्रार टीम ने नौ दिन बाद भी मकान मालिक से ये पता नहीं कर पाए कि किराएदार कौन है?

इस तेज तर्रार टीम की जांच एक आटो वाले , एक बढ़ई और किसी राजेश यादव के इर्दगिर्द ही घुम रही है और हो सकता है कि आने वाले एक दो दिनों में विभाग राजेश यादव को कोर्ट में भी पेश कर दे ।

इस हाईप्रोफाईल घटना में जो सबसे महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ रही है वो ये है कि विभाग की छापेमारी में जो लकड़ी बरामद हुई उसकी मात्रा सिर्फ पौन घन मिटर के लगभग ही है और रेंजर राठिया साहब की मानें तो इसकी अनुमानित बाजार रेट पचपन से साठ हजार ही होगी जबकि जप्ति के समय विभाग के डिप्टी रेंजर जांच अधिकारी महेश चंद्र पाण्डेय ने मीडिया को लगभग दो लाख की लकड़ी होने की बात कही । तो क्या इतने दिनों में लकड़ी का भी कोई खेल हो गया है ?
डिप्टी रेंजर ने ये भी कहा था की उनकी टीम विडियो ग्राफी करते हुए मकान में पहुंची इसका मतलब विभाग की टीम के विडियो में समस्त लकड़ीयों की जानकारी होगी ? ऐसे में विभाग को इस विडियोग्राफी को भी फिर से देखना चाहिए ।
अंदरूनी सूत्रों से जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार जिस समय वन विभाग की टीम ने मकान में छापेमारी की थी उस समय यहां काम चल रहा था और तीन से चार बढ़ई यहां काम कर रहे थे लेकिन वन विभाग की टीम के हाथ कोई नहीं आया । जैसे ही टीम इस रहस्यमयी मकान में पहुंची यहां काम कर रहे लोग मिस्टर इंडिया हो गए ।
जानकारी ये भी सामने आ रही है कि इस पूरे मामले में डीएफओ कुमार निशांत भड़के हुए हैं और उन्होंने सभी पक्षों पर कार्यवाही करने के निर्देश मातहत कर्मचारियों को दिए हैं । डीएफओ ने विभाग के कर्मचारियों से कहा कि सतयुग नहीं है सभी संबधित को पीआरओ जारी किया जाए और जल्द ही जांच पूर्ण करें । नहीं तो कार्यवाही के लिए तैयार रहें ।
इस पूरे मामले में रेंजर आर एस राठिया से जो बात की गई उसके बाद यही समझ आया कि विभाग का संपर्क अभी तक मकान मालिक से नहीं हो पाया है । मकान मालिक ने विभाग को अपने हास्पीटल में होने की जानकारी दी लेकिन किराएदार का नाम नहीं बताया जब मकान मालिक इतनी बात कर सकता है तो किराएदार का नाम क्यों नहीं बताया ?
इस मामले में वन विभाग के रेंजर आर एस राठिया का कहना था - जांच चल रही है जल्द ही चालान पेश किया जाएगा । छापे के दौरान 161 नग लकड़ी जप्त की गई जो 0.795 घनमीटर है अब कितने की होगी ये आफिस पहुंच कर ही बता सकता हूं ।
डीएफओ कुमार निशांत जी ने इंडिया क्राइम न्यूज को बताया कि - जांच चल रही है निष्पक्ष कार्यवाई के निर्देश दिए गए है।
दोषियों को बख्शा नही जाएगा।जांच में लापरवाही बरतने वालों पर भी होगी कार्यवाई।
बहरहाल इस पुरे मामले विभाग के उपर कई सवाल जनता उठा रही है। सवालों के जवाब विभाग किस प्रकार देता है ये देखना होगा।असल किरायेदार को जांच टीम क्यों नही बना रही आरोपी ऐसे कई गंभीर सवाल जिनके जबाब आने शेष है ।
आगे क्रमश...
मकान किसी का ,,किराएदार कोई और लेकिन वन विभाग की जांच के दायरे में कोई और ।
वन विभाग जिसे पेश करने की तैयारी कर रहा वो किराएदार है या नहीं इस पर विभाग को संशय ।
रेंजर को मकान मालिक ने कहा हास्पीटल में हूं लेकिन किराएदार का नाम नहीं बताया ।
इंडिया क्राइम न्यूज़
बिलासपुर-- कोटा वन विभाग की एक तेज तर्रार टीम ने कोटा के फ़िरंगिपरा श्री दिनेश पांडे के मकान से 13/5/23 को बड़ी मात्रा में सागौन की लकड़ी और उससे बन रहे फर्नीचर को जप्त किया था । ये पुरानी बात हो गई है नई मजेदार बात ये है कि इस तेज तर्रार टीम ने नौ दिन बाद भी मकान मालिक से ये पता नहीं कर पाए कि किराएदार कौन है?

इस तेज तर्रार टीम की जांच एक आटो वाले , एक बढ़ई और किसी राजेश यादव के इर्दगिर्द ही घुम रही है और हो सकता है कि आने वाले एक दो दिनों में विभाग राजेश यादव को कोर्ट में भी पेश कर दे ।

इस हाईप्रोफाईल घटना में जो सबसे महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ रही है वो ये है कि विभाग की छापेमारी में जो लकड़ी बरामद हुई उसकी मात्रा सिर्फ पौन घन मिटर के लगभग ही है और रेंजर राठिया साहब की मानें तो इसकी अनुमानित बाजार रेट पचपन से साठ हजार ही होगी जबकि जप्ति के समय विभाग के डिप्टी रेंजर जांच अधिकारी महेश चंद्र पाण्डेय ने मीडिया को लगभग दो लाख की लकड़ी होने की बात कही । तो क्या इतने दिनों में लकड़ी का भी कोई खेल हो गया है ?
डिप्टी रेंजर ने ये भी कहा था की उनकी टीम विडियो ग्राफी करते हुए मकान में पहुंची इसका मतलब विभाग की टीम के विडियो में समस्त लकड़ीयों की जानकारी होगी ? ऐसे में विभाग को इस विडियोग्राफी को भी फिर से देखना चाहिए ।
अंदरूनी सूत्रों से जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार जिस समय वन विभाग की टीम ने मकान में छापेमारी की थी उस समय यहां काम चल रहा था और तीन से चार बढ़ई यहां काम कर रहे थे लेकिन वन विभाग की टीम के हाथ कोई नहीं आया । जैसे ही टीम इस रहस्यमयी मकान में पहुंची यहां काम कर रहे लोग मिस्टर इंडिया हो गए ।
जानकारी ये भी सामने आ रही है कि इस पूरे मामले में डीएफओ कुमार निशांत भड़के हुए हैं और उन्होंने सभी पक्षों पर कार्यवाही करने के निर्देश मातहत कर्मचारियों को दिए हैं । डीएफओ ने विभाग के कर्मचारियों से कहा कि सतयुग नहीं है सभी संबधित को पीआरओ जारी किया जाए और जल्द ही जांच पूर्ण करें । नहीं तो कार्यवाही के लिए तैयार रहें ।
इस पूरे मामले में रेंजर आर एस राठिया से जो बात की गई उसके बाद यही समझ आया कि विभाग का संपर्क अभी तक मकान मालिक से नहीं हो पाया है । मकान मालिक ने विभाग को अपने हास्पीटल में होने की जानकारी दी लेकिन किराएदार का नाम नहीं बताया जब मकान मालिक इतनी बात कर सकता है तो किराएदार का नाम क्यों नहीं बताया ?
इस मामले में वन विभाग के रेंजर आर एस राठिया का कहना था - जांच चल रही है जल्द ही चालान पेश किया जाएगा । छापे के दौरान 161 नग लकड़ी जप्त की गई जो 0.795 घनमीटर है अब कितने की होगी ये आफिस पहुंच कर ही बता सकता हूं ।
डीएफओ कुमार निशांत जी ने इंडिया क्राइम न्यूज को बताया कि - जांच चल रही है निष्पक्ष कार्यवाई के निर्देश दिए गए है।
दोषियों को बख्शा नही जाएगा।जांच में लापरवाही बरतने वालों पर भी होगी कार्यवाई।
बहरहाल इस पुरे मामले विभाग के उपर कई सवाल जनता उठा रही है। सवालों के जवाब विभाग किस प्रकार देता है ये देखना होगा।असल किरायेदार को जांच टीम क्यों नही बना रही आरोपी ऐसे कई गंभीर सवाल जिनके जबाब आने शेष है ।
आगे क्रमश...
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