पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने वाला छत्तीसगढ़.. देश का दूसरा मत्वपूर्ण राज्य बना।
इंडिया क्राइम न्यूज़
बिलासपुर-- प्रदेश में पत्रकारों का बड़ा संगठन सदभाव पत्रकार संघ छत्तीसगढ़ ने कई बार पत्रकार सुरक्षा कानून पारित करने का ज्ञापन प्रदेश के मुखिया सहित प्रसाशन को दिया साथ ही अन्य पत्रकार संगठनों ने भी पुरजोर मांग की थी और 5 फरवरी को सदभाव पत्रकार संघ छत्तीसगढ़ के प्रैदेशिक सम्मेलन में बिलासपुर के सम्माननीय बिधायक शैलेष पांडेय जी ने भी कहा था कि हमारी सरकार पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के लिए प्रयासरत है और जल्द ही इसी सत्र में पत्रकार सुरक्षा कानून बन जायेगा।
और वह घड़ी 22 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ राज्यं के इतिहास में स्वर्णिम अच्छरो में लिखी गई।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को छत्तीसगढ़ मीडियाकर्मी सुरक्षा विधेयक, 2023 सर्वसम्मति से पारित हुआ। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में विधेयक प्रस्तुत करते हुए कहा कि लंबे समय. से पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग की जा रही थी। वर्तमान में पत्रकारों के साथ जो स्थिति बनी है, उसके बाद सुरक्षा प्रदान करना शासन की जिम्मेदारी बनती है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य है, जहां पत्रकार सुरक्षा कानून बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कानून देश में मिशाल बनेगा, स्वर्णीम अक्षरों में लिखा जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने विधेयक के खंडों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साल 2019 में जस्टिस आफताफ आलम की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया समिति के सदस्यों ने विभिन्न मीडिया संस्था- और मीडिया कर्मियों से सुझाव लिए । बस्तर, अंबिकापुर, बिलासपुर, रायपुर में भी पत्रकारों के बीच जाकर चर्चा की गई।
मीडियाकर्मी सुरक्षा कानून कैसे बना
दिल्ली में भी जाकर एडिटर गिल्ड से कानून के बारे में सुझाव मांगे गए। ऑनलाइन सुझाव भी लिए गए। उन्होंने बताया कि तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद इस विधेयक के प्रारूप को अंतिम रूप दिया गया। पत्रकार सुरक्षा कानून पर सदन में बहस भी हुई विधेयक भले ही सर्वसम्मति से पारित हुआ, मगर विधानसभा में छत्तीसगढ़ मीडियाकर्मी सुरक्षा विधेयक, 2023 को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में जमकर बहस हुई। विपक्ष ने विधेयक का समर्थन करते हुए सुझाव दिया कि इसके प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जा सकता है, इसलिए इसे प्रवर समिति को भेजा जाए।
सत्तापक्ष ने इसका विरोध किया और विरोध लगातार बढ़ता गया। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के इस सुझाव का सत्तापक्ष ने विरोध किया।
नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि जस्टिस की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी, मगर रिपोर्ट का कुछ हिस्सा विलोपित कर दिया गया, इसलिए रिपोर्ट सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए।
विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि विधेयक अच्छा है, मगर केवल प्रभावशाली पत्रकारों को ही इसकी सुविधा मिलेगी। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच इस मुद्दे पर जमकर तकरार हुई।
इस कानून में .......ये सभी आएंगे दायरे में
मुख्यमंत्री जी ने बताया कि इस विधेयक में अधिमान्यता प्राप्त मीडिया कर्मियों, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थान, स्ट्रिंगर, उपसंपादक, संवाददाता, बेबपोर्टल,प्रेसकर्मी सभी के लिए प्रावधान किए गए हैं। यह मूल विधेयक है, आने वाले समय में जरूरत पड़ी तो संशोधन भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस कानून के तहत शिकायत की जांच और गलत शिकायत को लेकर भी प्रावधान किए हैं। उन्होंने पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने में पूरी पारदर्शिता बरती है।
सदभाव पत्रकार संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष आर डी गुप्ता एवम प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष देवदत्त तिवारी ने संघ पत्रकारों की पुरानी मांग को, मीडिया कर्मी सुरक्षा विधेयक पास कर कानून बनाने के लिए, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को धन्यवाद ज्ञापित किया।
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