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संबिधान दिवस के अवसर पर कोटा जनप्रतिनिधियों, एवम पत्रकारों ने देखी सावरमती फ़िल्म..फ़िल्म वास्तव में है देखने ..समझने लायक।

गुजरात के गोधरा रेल्वे स्टेशन में ट्रेन के पहुचते ही जिस तरह 59 निर्दोषों को बोगियों के अंदर जलाया गया बेहद दर्दनाक कांड था,फ़िल्म इसे दर्शाती है।

 इंडिया क्राइम न्यूज़ 

बिलासपुर-- सावरमती फ़िल्म 2002 के उस भयानक दा बर्निंग ट्रेन कांड की असलियत को उजागर करती है जिसे तत्कालीन जिम्मेदारों ने दबाकर दुर्घटना बता कर फाइल बंद कर दी थी। और सैकड़ो लोग जले, बे घर हुए, और 59 लोगो की जलने से मौत हो गई जिसमें महिलाएं छोटे बच्चे और पुरुष थे।

इस फ़िल्म को देखने कोटा से लगभग 60 भाजपा के नेता गण,जनप्रतिनिधिगण, पत्रकारों एवम छात्रों ने फ़िल्म बिलासपुर पहुँच कर देखी।

दरअसल ट्रेन सावरमती गाड़ी के एस 6 एस 7 में अयोद्धया से महायज्ञ की पूर्णाहुति कर श्री राम भक्त वापस आ रहे थे इसमें लड़के, लड़कियाँ,छोटे बच्चे और बुजुर्ग जवान महिला पुरुष खचाखच भरे थे।

गुजरात के गोधरा स्टेशन पहुचते ही कुछ खाश समुदाय के लोगों ने पहले 3 दिन से ही इस ट्रेन को जलाने की साजिश रच ली थी।आपसी सौहार्द बिगाड़ने, भाईचारा को खत्म करने,भारत को जातिवाद के दंगों में जलाने की साजिश रची गई थी।

फ़िल्म में दिखाया गया की जाँच में गड़बड़ी कर कुछ बताया गया और मीडिया ने भी सच की गहराई और सच्चाई को दबाते हुए कुछ दिखाया,और जनता को जो दिखाया जाता है वही सच मान बैठती है। पर सत्य ज्यादा दिन दबा नही रह सका और कुछ बर्षों बाद ही सही, पर गोधरा कांड सावरमती का सच सामने आया जो बेहद चौकाने वाला था।

आपसी झगड़े के आड़ में भारतीयता का गला घोंटने की कोशिश की गई थी परंतु समय के साथ साथ गुजरात के दंगे का सच सामने आया,और दोषियों पर कार्यवाई भी हुई। फिर स्थिरता आई और गुजरात मे बिकाश तेजी से होने लगा।

इस को देखने से समझने की जरूरत है कि हम सब भारतीय है हमे किसी भी हाल में आपसी भाईचारा,प्रेम सौहार्द बिगड़ने नही देना है। भारत का सम्मान है तो हमारा सम्मन है। हमारा संबिधान ही देश का जीवंत भगवान है, इसकी मर्यादा की रक्षा करना हर भारतीय का धर्म है।

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