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पुरातत्व विभाग.. एसईसीएल बुड़बुड़ खदान के अधिकारियों को सिखायेगा सबक .. हैवी ब्लास्टिंग के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर करेंगे रिट, एसईसीएल की मनमानी चरम पर

पुरातत्व विभाग.. एसईसीएल बुड़बुड़ खदान के अधिकारियों को सिखायेगा सबक .. हैवी ब्लास्टिंग के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर करेंगे रिट, एसईसीएल की मनमानी चरम पर
हैबी ब्लास्टिंग से काँपती है धरती.. आस पास के सभी रहवासी परेशान..प्राचीन धरोहरों को भी हो रहा नुकसान।

इंडिया क्राइम न्यूज़
 
कोरबा/पाली-- साउथ एशिया की कंपनी एसईसीएल के पाली स्थित संचालित बुड़बुड़ खदान में बैठे अधिकारियों की मनमानी एवं ढीट रवैये से हो रही ऐतिहासिक धरोहर को क्षति के खिलाफ पुरातत्व विभाग जल्द ही रीट दायर करेगा।
 
ज्ञात हो कि एसईसीएल के सराईपाली परियोजना अंतर्गत बुड़बुड़ में ओपन कास्ट खदान संचालित हो रहा है। जहां बैठे ढीठ एवं बेलगाम अधिकारियों के मनमाने कार्यप्रणाली से खदान क्षेत्र के आसपास को भारी क्षति पहुँच रही जिसमे पाली का ऐतिहासिक शिव मंदिर भी शामिल है। बता दें कि खदान में जिस तरीके से रोजाना किये जा रहे हैवी ब्लास्टिंग से आसपास निवासियों के घरों की नींव डगमगाने लगी है तो वही प्रदेश सहित विदेश में भी चर्चित पाली के प्राचीन शिवमंदिर पर भी खतरा मंडराने लगा है।
 
इस दिशा पर जिले के सांसद प्रतिनिधि एवं गौ सेवा आयोग के सक्रिय सदस्य प्रशांत मिश्रा द्वारा भी पूर्व में एसईसीएल के बुड़बुड़ प्रबंधक को जमकर लताड़ लगाते हुए हैवी ब्लास्टिंग बंद किये जाने चेताया गया था। जहां प्रबंधन द्वारा कुछ दिनों तक उक्त चेतावनी को अमल में लाया तो गया लेकिन खदान से कोयला उत्पादन की त्रीवता के लिए किए जा रहे पुनः ब्लास्टिंग से ऐतिहासिक शिव मंदिर के नींव पर भी गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिल रहा है।
 
पुरातत्व विभाग के सीनियर अधिकारियों ने पहले भी एसईसीएल को नोटिस जारी कर पुरातात्विक धरोहर को हो रहे क्षति से अवगत कराते हुए हैवी ब्लास्टिंग नही किये जाने संबंधित प्रपत्र जारी किया गया था किंतु एसईसीएल के पाली खदान की जिम्मेदारी उठाने वाले लापरवाह अधिकारी कम समय मे अधिक उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में दे दनादन हैवी ब्लास्टिंग को अंजाम दे रहे है। जिसे लेकर पुरातत्व विभाग आने वाले दिनों में एसईसीएल बुड़बुड़ के खिलाफ उत्पादन पर पूर्ण रोक लगाने हाईकोर्ट में जनहित  याचिका दायर कर संबंधित अधिकारियों का तेल निकालेगा। जल्द ही बुड़बुड़ खदान के ढीठ अधिकारी नपेंगे व मनमानी को लेकर उन्हें  उच्च न्यायलय में जवाब देना पड़ेगा।
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