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*प्रधानपाठक ने की शिकायत 11 माह से स्कूल से नदारद सहायक शिक्षक, विकासखण्ड शिक्षाधिकारी कार्यालय बिल्हा से पूरा मिला बेतन, जाँच में तीन माह की अनियमितता हुई उजागर, लिपिक की बेतन बृद्धि पर लगी रोक।*

*प्रधानपाठक ने की शिकायत 11 माह से स्कूल से नदारद सहायक शिक्षक, विकासखण्ड शिक्षाधिकारी कार्यालय बिल्हा से पूरा मिला बेतन, जाँच में तीन माह की अनियमितता हुई उजागर, लिपिक की बेतन बृद्धि पर लगी रोक।*
*शिक्षक को बिना अवकाश स्वीकृति, कर दिया 3 माह का वेतन भुगतान, जांच में हुआ सनसनीखेज खुलासा, लिपिक के एक वर्षीय वेतन वृद्धि पर लगी रोक।*
 
*आर डी गुप्ता*
*इंडिया क्राइम न्यूज़*

*15/10/2020*

 
 *बिलासपुर*--खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिल्हा हमेशा रहा सुर्खियों में- संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर ने अपने आदेश क्रमांक 05 दिनांक 7 अक्टूबर 2020 के द्वारा विकास खंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा के कार्यालय में हुई वित्तीय अनियमितता के लिए खंड लिपिक एन पी डाहिरे को जानबूझकर वित्तीय अनियमितता किए जाने के कारण एक वर्षीय वेतन वृद्धि अ संचयी प्रभाव से रोकने का आदेश जारी किया है। आदेश के बाद से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। वजह है ऐसे सैकड़ों शिक्षक हैं जो महीनों स्कूल नहीं आते और घर बैठे वेतन प्राप्त कर शासकीय कोष को क्षति पहुंचा रहे हैं।

  ज्ञात हो कि प्रधान पाठक प्राथमिक शाला इंदिरा नगर,दयालबंद बिलासपुर ने दिनेश सिंह ठाकुर सहायक शिक्षक के लगातार 11 माह से अनुपस्थित रहने की शिकायत सूचना विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिल्हा को लिखित में दिया था लेकिन विकास खंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा व खंड लिपिक ने उसे जानबूझकर अनदेखा करते हुए संबंधित शिक्षक को लगातार प्रति माह वेतन भुगतान करते हुए शासकीय कोष को क्षति पहुंचाया जिसके लिए संबंधित विकास खंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा भी जिम्मेदार है।

 

  नियमानुसार विकास खंड शिक्षा अधिकारी के वेतन से उक्त वित्तीय अनियमितता की राशि की भरपाई की जानी चाहिए।

 

 हालाकि संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर के द्वारा जारी निर्देश में शिक्षक को वेतन के रूप में नियम विरुद्ध भुगतान किए गए लाखों रुपए, अवैध रूप से आहरित की गई राशि किसके द्वारा जमा कराई जाएगी यह लेख नहीं है। 

जारी आदेश में अवैध रूप से वेतन प्राप्त करने वाले शिक्षक के विरुद्ध क्या कार्यवाही होती है, इन सभी बातों का अपने जारी आदेश में जिक्र नहीं किया है यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है।

फिलहाल तो पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि शिकायत 30/12/2019 में की गई थी कछुए की चाल से 9 माह चली जांच में शिक्षक को चिकित्सा अवकाश पर बताया गया मतलब जांच में शिक्षक,लिपिक और बीईओ को अपनी लापरवाही सुधारने का भरपूर मौका मिला उन्होंने लीपापोती कर उसे तीन महीने वित्तीय अनियमितता दर्शा दी शासन के खजाने में सेंध लगाने वाले शिक्षक,जिम्मेदार विकास खंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा से राशि की रिकवरी हेतु कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जो की गई जांच पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
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