मिट्टी के दिए चाक में बनाना एक उच्च कलाकार की कला को प्रदर्शित करता है।
इंडिया क्राइम न्यूज़
रायपुर - राजधानी रायपुर के डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डीपीएस दिनेश मिस्त्री जी ने चाक चला कर मिट्टी के दिये बना कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन कर आत्मनिर्भर भारत का संदेश जनमानस को दिया।
हमारे भारत की विरासत मिट्टी के बर्तन बहुत ही अपनी खूबसूरती के लिए विश्व प्रसिद्ध थे, इसमें किसानों एवम ग्रामीणों को जो इस ब्यवसाय से जुड़े थे मिट्टी को पानी डाल कर रौंदते थे उसको बर्तन जैसे घड़े, मटकी, डहरी, दिया, परई, हवनदानी, गुल्लक, हाथी, घोड़े, गाय, बैल, ऊंट, न जाने कितने प्रकार के मिट्टी के आकर्षक एवम बहुउपयोगी चीजें बनाते थे। चाक में मट्टी रख कर तेजी से चाक को घुमाते थे और फिर हाँथ का सहारा देकर बर्तनों का मनचाहा आकर कलाकार देते थे, आज भी ये बस्तुएं बनाई जा रही है लेकिन प्लास्टिक के सामानों के आगे ये महान कला बिलुप्त होते जा रही है।
घड़े में अंदर से कलाकार हाथ का सहारा देकर ऊपर से लकड़ी के गुटके से ठोंक ठोंक कर घड़े मटकी को बनाते थे आकार देते थे। आज भी उदाहरण लोग देते है कि सद्गुरु कुंभकार की तरह होते है अपने शिष्यों को ऊपरी संसार से चोट मार कर अंतरात्मा को ज्ञान रूपी सहारा देते हुए बुद्धत्व को प्राप्त कराते है।
आज डीपीएस दिनेश मिस्त्री जी ने अपने अंदर की कला का प्रदर्शन करते हुए दिए बनाये जो एक अधिकारी के लिए जटिल कार्य है परंतु उन्होंने आत्मनिर्भर भारत का उदाहरण दिया वोकल फ़ॉर लोकल का संदेश दिया साथ ही देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जे के उद्देश्यों वोकल फ़ॉर लोकल को भी साकार करने का संदेश दिया, भारत के कर्मबीरों के लिए कुछ भी ना मुमकिन नही है, प्रयास और लगन से सब कुछ संभव है।
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रायपुर - राजधानी रायपुर के डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डीपीएस दिनेश मिस्त्री जी ने चाक चला कर मिट्टी के दिये बना कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन कर आत्मनिर्भर भारत का संदेश जनमानस को दिया।
हमारे भारत की विरासत मिट्टी के बर्तन बहुत ही अपनी खूबसूरती के लिए विश्व प्रसिद्ध थे, इसमें किसानों एवम ग्रामीणों को जो इस ब्यवसाय से जुड़े थे मिट्टी को पानी डाल कर रौंदते थे उसको बर्तन जैसे घड़े, मटकी, डहरी, दिया, परई, हवनदानी, गुल्लक, हाथी, घोड़े, गाय, बैल, ऊंट, न जाने कितने प्रकार के मिट्टी के आकर्षक एवम बहुउपयोगी चीजें बनाते थे। चाक में मट्टी रख कर तेजी से चाक को घुमाते थे और फिर हाँथ का सहारा देकर बर्तनों का मनचाहा आकर कलाकार देते थे, आज भी ये बस्तुएं बनाई जा रही है लेकिन प्लास्टिक के सामानों के आगे ये महान कला बिलुप्त होते जा रही है।
घड़े में अंदर से कलाकार हाथ का सहारा देकर ऊपर से लकड़ी के गुटके से ठोंक ठोंक कर घड़े मटकी को बनाते थे आकार देते थे। आज भी उदाहरण लोग देते है कि सद्गुरु कुंभकार की तरह होते है अपने शिष्यों को ऊपरी संसार से चोट मार कर अंतरात्मा को ज्ञान रूपी सहारा देते हुए बुद्धत्व को प्राप्त कराते है।
आज डीपीएस दिनेश मिस्त्री जी ने अपने अंदर की कला का प्रदर्शन करते हुए दिए बनाये जो एक अधिकारी के लिए जटिल कार्य है परंतु उन्होंने आत्मनिर्भर भारत का उदाहरण दिया वोकल फ़ॉर लोकल का संदेश दिया साथ ही देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जे के उद्देश्यों वोकल फ़ॉर लोकल को भी साकार करने का संदेश दिया, भारत के कर्मबीरों के लिए कुछ भी ना मुमकिन नही है, प्रयास और लगन से सब कुछ संभव है।
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