भोजन एवम रहने की ब्यवस्था रही सर्वोत्तम..अमरकंटक के लजीज स्वादिस्ट व्यंजनों को सभी साधको ने सराहा।
छह दिन ध्यान एवम निरती योग कार्यक्रम में पूरे देश के सभी प्रान्तों से व बिदेश भी साधक हुए सामिल..सभी हुए आनंदित।
इंडिया क्राइम न्यूज़
अमरकंटक--ओशोधारा --सनातन धर्म की रक्षा के मार्ग में आगे बढ़ने वाले समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया सरकार के आशीर्वाद और शिव पुत्री-मेकल सुता मां नर्मदा माई की असीम कृपा से अमरकंटक, ओशोधारा की जन्म स्थली में आप सभी शांत चित्त मंगल मूर्तियों को यहाँ की उत्तम भोजन ब्यवस्था, स्वादिस्ट लजीज व्यन्जन नित नई भोजन प्रसाद की डिशेज पसंद आईं.

यंहा मैकल पर्वत श्रंखलाओं के बीच पतित पावन सिद्ध क्षेत्र नर्मदा तट पर बने होटल, आश्रम आप सभी दिव्य आत्माओं को पसंद आये,

हमारी ओशोधारा मैत्री संघ छत्तीसगढ़ के सभी साधक व साधिकाओं की सेवाएं पसंद आईं।
आप सभी के इतने सुंदर फीडबैक से छत्तीसगढ़ की पूरी टीम गौरवान्वित महसूस कर रही है।

यह सब हमारे प्यारे समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया सरकार और नर्मदा माई की कृपा, महंत अनंत श्री विभूषित रामभूषण दास जी महराज के सहयोग, और इस क्षेत्र में दृश्य व अदृश्य रूप से उपस्थित सभी दिव्य आत्माओं की वजह से हुआ है।

नही तो जंगल मे मंगल कैसे होता?
यंहा हर जरूरत की चीज पेंड्रा या सौ किलोमीटर दूर बिलासपुर से मंगाना पड रहा था।

पर एक बात अनुभव में आई कि जहाँ गुरु की उपस्थिति होती है वहाँ हर कार्य आसानी से सम्भव हो जाता है।

ओशोधारा के सेंट्रल कोऑर्डिनेटर, छत्तीसगढ़ के मुखिया 'आचार्य दर्शन जी' के कुशल मार्गदर्शन एवं स्टेट कोऑर्डिनेटर हनुमान नाम से नवाजे गए 'श्री संतोष चंद्रा जी' की मेहनत एवं सभी साधक साधिकाओं के गुरुभक्ति के कारण यह गुरुसेवा सुंदर ठंग से सम्पन्न हुई।

ओशोधारा में असल मायने में 'जोरबा द बुद्धा' की बात करने वाले समर्थगुरु और परमगुरु ओशो के सिद्धांत को मूर्त रूप देने वाले 'आचार्य अमरेश झा जी' के स्नेह और प्रेम ने सभी को मंगलमय कर दिया।

और अमरकंटक की आध्यत्मिक यात्रा में समर्थगुरु के सारथी रहे डा. के.आर. सिंह जी और स्वामी नवरतन जी ने हमारे समर्थगुरू की यात्रा का पूरा ख्याल रखा ।

और दिव्य व्यंजनों की बगिया की देख रेख करने वाले स्वामी नवीन गुप्ता जी, आर डी गुप्ता जी, अश्वनी चंद्रा जी, प्रशांत गुप्ता जी, मां अनिता गुप्ता जी, और स्वादिस्ट व्यंजनों को पकवाने व खिलाने वाले रोहणी गुप्ता जी एवं उनके सभी स्टाफ की मेहनत से हम सब स्वादिष्ट पकवानों, व्यंजनों का स्वाद लेकर खा पाये, अपनी साधना में आगे बढ़े आनंदित होते हुए मंगल भाव के धनी बने और सदगुरु ने जो मंगल भाव से मंगल उपनिषद हम सब के जीवन मे उतारा वह अद्भुत, अविस्मरणीय, अकल्पनीय रहा।

छह दिन कैसे बीते किसी को पता ही नही चला, ऐसा लग रहा था मानो गोविंद स्वरूप समर्थगुरु के मंगल बारात में आयें हो और सभी दिव्य चेतनाएँ शरीर धारण कर अमरकंटक के पावन धरा पर बराती बनकर आए हों, और स्वयं लक्ष्मी नारायण भगवान अपने भक्तों के लिए व्यंजनों को स्वादिस्ट पौष्टिक, मनमोहक और सुंदर बना रहे हों।

समर्थगुरु के सानिध्य में आप सब दिव्य स्वरूपों के दर्शन एवं सेवा करने से ऐसा लग रहा है कि हमारी छत्तीसगढ़ ओशोधारा की सेवा सभी साधक सन्यासियों की सेवाएं गुरु गोबिंद ने स्वीकार कर लीं है।

बहुत बहुत अहोभाव..बाबा के सानिध्य में हम सब का मंगल हुआ, और आगे भी मंगल होता रहेगा।पुनः फिर सभी की सेवा का सौभाग्य प्राप्त हो इन्ही कामनाओं के साथ..हरि ॐ.. तत्सत।
छह दिन ध्यान एवम निरती योग कार्यक्रम में पूरे देश के सभी प्रान्तों से व बिदेश भी साधक हुए सामिल..सभी हुए आनंदित।
इंडिया क्राइम न्यूज़
आर डी गुप्ता
अमरकंटक--ओशोधारा --सनातन धर्म की रक्षा के मार्ग में आगे बढ़ने वाले समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया सरकार के आशीर्वाद और शिव पुत्री-मेकल सुता मां नर्मदा माई की असीम कृपा से अमरकंटक, ओशोधारा की जन्म स्थली में आप सभी शांत चित्त मंगल मूर्तियों को यहाँ की उत्तम भोजन ब्यवस्था, स्वादिस्ट लजीज व्यन्जन नित नई भोजन प्रसाद की डिशेज पसंद आईं.

यंहा मैकल पर्वत श्रंखलाओं के बीच पतित पावन सिद्ध क्षेत्र नर्मदा तट पर बने होटल, आश्रम आप सभी दिव्य आत्माओं को पसंद आये,

हमारी ओशोधारा मैत्री संघ छत्तीसगढ़ के सभी साधक व साधिकाओं की सेवाएं पसंद आईं।
आप सभी के इतने सुंदर फीडबैक से छत्तीसगढ़ की पूरी टीम गौरवान्वित महसूस कर रही है।

यह सब हमारे प्यारे समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया सरकार और नर्मदा माई की कृपा, महंत अनंत श्री विभूषित रामभूषण दास जी महराज के सहयोग, और इस क्षेत्र में दृश्य व अदृश्य रूप से उपस्थित सभी दिव्य आत्माओं की वजह से हुआ है।

नही तो जंगल मे मंगल कैसे होता?
यंहा हर जरूरत की चीज पेंड्रा या सौ किलोमीटर दूर बिलासपुर से मंगाना पड रहा था।

पर एक बात अनुभव में आई कि जहाँ गुरु की उपस्थिति होती है वहाँ हर कार्य आसानी से सम्भव हो जाता है।

ओशोधारा के सेंट्रल कोऑर्डिनेटर, छत्तीसगढ़ के मुखिया 'आचार्य दर्शन जी' के कुशल मार्गदर्शन एवं स्टेट कोऑर्डिनेटर हनुमान नाम से नवाजे गए 'श्री संतोष चंद्रा जी' की मेहनत एवं सभी साधक साधिकाओं के गुरुभक्ति के कारण यह गुरुसेवा सुंदर ठंग से सम्पन्न हुई।

ओशोधारा में असल मायने में 'जोरबा द बुद्धा' की बात करने वाले समर्थगुरु और परमगुरु ओशो के सिद्धांत को मूर्त रूप देने वाले 'आचार्य अमरेश झा जी' के स्नेह और प्रेम ने सभी को मंगलमय कर दिया।

और अमरकंटक की आध्यत्मिक यात्रा में समर्थगुरु के सारथी रहे डा. के.आर. सिंह जी और स्वामी नवरतन जी ने हमारे समर्थगुरू की यात्रा का पूरा ख्याल रखा ।

और दिव्य व्यंजनों की बगिया की देख रेख करने वाले स्वामी नवीन गुप्ता जी, आर डी गुप्ता जी, अश्वनी चंद्रा जी, प्रशांत गुप्ता जी, मां अनिता गुप्ता जी, और स्वादिस्ट व्यंजनों को पकवाने व खिलाने वाले रोहणी गुप्ता जी एवं उनके सभी स्टाफ की मेहनत से हम सब स्वादिष्ट पकवानों, व्यंजनों का स्वाद लेकर खा पाये, अपनी साधना में आगे बढ़े आनंदित होते हुए मंगल भाव के धनी बने और सदगुरु ने जो मंगल भाव से मंगल उपनिषद हम सब के जीवन मे उतारा वह अद्भुत, अविस्मरणीय, अकल्पनीय रहा।

छह दिन कैसे बीते किसी को पता ही नही चला, ऐसा लग रहा था मानो गोविंद स्वरूप समर्थगुरु के मंगल बारात में आयें हो और सभी दिव्य चेतनाएँ शरीर धारण कर अमरकंटक के पावन धरा पर बराती बनकर आए हों, और स्वयं लक्ष्मी नारायण भगवान अपने भक्तों के लिए व्यंजनों को स्वादिस्ट पौष्टिक, मनमोहक और सुंदर बना रहे हों।

समर्थगुरु के सानिध्य में आप सब दिव्य स्वरूपों के दर्शन एवं सेवा करने से ऐसा लग रहा है कि हमारी छत्तीसगढ़ ओशोधारा की सेवा सभी साधक सन्यासियों की सेवाएं गुरु गोबिंद ने स्वीकार कर लीं है।

बहुत बहुत अहोभाव..बाबा के सानिध्य में हम सब का मंगल हुआ, और आगे भी मंगल होता रहेगा।पुनः फिर सभी की सेवा का सौभाग्य प्राप्त हो इन्ही कामनाओं के साथ..हरि ॐ.. तत्सत।
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