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*डी के पी स्कूल का नाम बदल कर स्वामी आत्मानन्द करना.. दान बीर कर्मयोगी.. दयाभाई पटेल कुशाल भाई पटेल के त्याग का अपमान होगा।*

*डी के पी स्कूल का नाम बदल कर स्वामी आत्मानन्द करना.. दान बीर कर्मयोगी.. दयाभाई पटेल कुशाल भाई पटेल के त्याग का अपमान होगा।*

हिंदी-हिन्दू-हिंदुस्तान का सपना ऐसे डी के पी जैसे स्कूलों से और ऐसे दानदाताओं से ही संभव हुआ है..अंग्रेजी और अंग्रेजो से नही।

इंडिया क्राइम न्यूज़

बिलासपुर-- करगीरोड कोटा में डी के पी ( दया भाई कुशाल भाई पटेल के ) के नाम से हिंदी मीडियम स्कूल चल रहा है। इस स्कूल को पटेल परिवार ने लगभग स्कूल और ग्राउंड के लिये सात एकड़ जमीन दान में दी थी। यह स्कूल सबसे पुराना और पढ़ाई के लिए सबसे बेहतर शिक्षा देने के स्कूलों में से एक है।

यह स्कूल पटेल परिवार ने अपने परिवार का नाम अमर बना रहे इस स्कूल के माध्यम से इस लिए इतनी जमीन दान में दी थी और क्षेत्र के गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त होती रहे साथ मे दया भाई पटेल कुशहाल भाई पटेल का नाम ड़ी के पी स्कूल के माध्यम से अमर रहे।परंतु यह सरकार उन दान दाताओं के अरमानों में पानी फेर रही है। बेहतर शिक्षा देना इंगलिस माध्यम से शिक्षा देना तो अच्छी बात है। परंतु दान की जमीन में संचालित दान दाताओं के द्वारा दी गई करोडों रुपये की जमीन में संचालित स्कूल का नाम बदलने जिसमें उनका नाम चलता था को बदल कर स्वामी आत्मा नन्द करना नगर सहित आस पास की जनता और उनके परिवार को भी  पसन्द नही होगा, यह ऐसे महान दान दाताओं की भावनाओ  का अपमान होगा।

इस स्कूल को पहले कोटा नगर पालिका संचालित करती थी बाद में सरकार ने अधिमान्यता देते हुए संचालित करने लगी तब से लेकर आज तक इस स्कूल से पढ़ कर निकले बच्चे आज बड़े बड़े पदों पर  बैठ कर देश की सेवा कर रहे है। हिंदी- हिन्दू- हिंदुस्तान की पहचान है।

अंग्रेजी माध्यम के लिए मातृ भाषा हिंदी माध्यम स्कूल जो दान दाताओं के नाम से संचालित हो उसका नाम बदलना जनता जनार्दन की नजर में न्याययोचित नही होगा।

जानकारों के अनुसार सरकार स्वामी आत्मानंद स्कूलों के संचालन के लिये अलग से भवन और इंग्लिश मीडियम के ट्रेंड टीचरों की ब्यवस्था करेगी पर यँहा तो पुराने भवनों को ही  जंहा पहले से भी बेहतर शिक्षा दी जा रही थी को ही नाम बदल कर आत्मा नन्द स्कूल का बोर्ड लगा कर संचालित किंया जा रहा है।

फिलहाल अच्छी शिक्षा देना सरकार का काम है पर जंहा अच्छी शिक्षा पहले से ही दी जा रही हो उसे और अच्छा बनाना भी अच्छा है, परंतु दान की जमीन से उन दानदाताओं के नाम को बदलना जन मानस की भावनाओं के साथ खिलवाड़ की नजर से यँहा की जनता देख रही है। और लोगों की मांग भी है कि इसका नाम डी के पी ही रहने दिया जाय।

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