*त्वदीयपाद्य पंकजम नमामि देवि नर्मदे..नर्वदे हर..।*
*इंडिया क्राइम न्यूज़*
*बिलासपुर--* *त्वदीयपाद्य पंकजम नमामि देवि नर्मदे..नर्वदे हर..* के गगन भेदी स्वर मातु नर्मदा तट पर सुनाई देते है, इन स्वरों के सुनने मात्र से ही जन्मों - जन्मों के पाप नष्ट हो जाते है। आज मां नर्मदा के किनारे बसे अमरकंटक, जोगी डबरी, जबलपुर के ग्वारीघाट, भेड़ाघाट, सहित कई ऐसे स्थानों पर नर्मदा जयंती बड़ी धूम धाम से मनाई जाती है, जगह जगह विशाल भंडारों का आयोजन होता है। लोग बड़े ही श्रद्धाभाव से स्नान दान तर्पण पूजन आरती करते है और मनो बांछित फल प्राप्त करते है।
ग्वारीघाट में मां की शाम की महा आरती - आरत हरणी- होती है। देखने योग्य होती है। धरती पर गंगा जी के दर्शन स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और नर्मदा जी के स्नान करने से नर्मदा तट में तपस्या करने से सिद्धियां और ज्ञान प्राप्त होता है। बेद कहते है *"दरस परस मुख मज्जन पाना-हरहिं पाप कह बेद पुराना।* ऐसी पवित्र जीवन्त नदियों के दर्शन करने से, छूने से, मुँह धोने मात्र से पापों का नाश हो जाता है, तो फिर स्नान दान तप करने से सकल मनोरथ, और चारो पदार्थों की प्राप्ति हो जाती है। मोक्ष ज्ञान सिद्धियां प्राप्त होती है। मां नर्मदा जी मां गंगा जी तो धरती में साक्षात जीवित देवियां है।

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