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कोटा..पांडे के मकान से सागौन,सरई की बेशकीमती लकड़ी के चिरान,अधूरे फर्नीचर बड़ी मात्रा में बरामद.. वन विभाग की टीम ने की छापेमार कार्यवाई,और जब्ती..तस्कर भागने में हुए सफल।

मामले को दबाने के लिए दबंग लोग कर रहे प्रयास..लम्बे समय से चल रहा यह कारखाना।

इंडिया क्राइम न्यूज़


बिलासपुर-- कोटा वनपरिक्षेत्र अंतर्गत वेश कीमती इमारती लकड़ी सागौन,सरई एवम अन्य प्रतिबंधित लकड़ियों की कटाई जंगलो से बेखौफ लकड़ी तस्करों के द्वारा की जा रही है। साथ ही मिलीभगत करके कोटा और आसपास के क्षेत्रों में भी फर्नीचर बना कर बेच रहे है। जबकि वन विभाग के अधिकारी ऑफिस सभी कोटा में मौजूद है।तो फिर ऐसा कैसे हो रहा है जंगल  अबैध तरीके से कट रहे है। शूत्रों की माने तो कुछ वन बिभाग के कर्मचारी  बर्षो से एक ही जगह पर पदस्थ है जबकी तीन साल में ट्रांसफर होना चाहिए इनके संबंध सभी से है यँहा से भी तस्करी को बढ़ावा मिला रहा है,सूचनाएं भी हो रही लीक

बड़ी तस्करी का मामला कोटा के फिरंगीपारा में एक नव निर्माणाधीन कालोनी जंहा दो तीन घर बने है वंहा एक घर जो किसी दिनेश पांडे का बताया जा रहा है मे कुछ लोग किराये से रहते है और उसी घर मे कीमती इमारती लकड़ी सागौन, सरई के अबैध फर्नीचर बनाने का काम कई महीनों से किया जा रहा है जिनको बाजार में सेल किया जाता है।इस कार्य की संलिप्तता में कुछ और भी लोग शामिल हो सकते है। मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग की टीम मौके में छाप मार करवाई कर लकड़ी को जप्त कर लिया है। इस बात का पता लगाया जा रहा है कि घर किसका है,किसको किराये में दिया गया था और इसमें कौन किराये से लेकर लकड़ी तस्करी का कार्य करवा रहा है।कुछ अहम लोगो के  नाम सामने आ सकते हैं।

बहरहाल उच्च अधिकारियों के निर्देश पर वनविभाग की टीम जप्ती की कार्यवाई कर लकड़ी को पिकअप वैन में डलवा कर ले गई है, शुत्रों के अनुसार तस्कर लकड़ी के बिल के जुगाड़ में सेटिंग का खेल खेलने में लगे है। जाँच के दौरान कोई बिल पेश नही हुआ।

 

सूचना के अनुसार तस्कर रात में थे फिर आज सुबह फर्नीचर बनाने वाले और तस्कर कैसे भागे...किस ने दी छापे की सूचना..इतनी मात्रा में लकड़ी कैसे आई सहर के बीच..कौन है इस खेल में शामिल..वन विभाग के आला अफसर करें इसकी जाँच..?


आगे क्रमशः..
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